सिद्धार्थनगर। सनसनी फैला देेने वाले प्रशांत गुप्ता हत्याकांड में शामिल तीसरा आरोपी एक माह बाद भी पुलिस की पकड़ से दूर है। साजिश के तहत हुई इस वारदात में मृतक की प्रेमिका और उसका मौजूदा प्रेमी दबोचे गए थे। जबकि तीसरा आरोपी हत्याकांड के बाद से फरार है। वारदात के बाद पुलिस को गैर प्रांत में उसका लोकेशन मिला था, लेकिन इसके बाद से मोबाइल बंद है। पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे चुकी है, लेकिन हाथ खाली हैं। मृतक के करीबी से संबंध है। इसलिए वह कत्ल में शामिल हुआ था। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी में पुलिस का तंत्र फेल नजर आ रहा है।
सदर थाना क्षेत्र के भीमापार गांव निवासी प्रशांत की गुप्ता की योजनाबद्ध तरीके से 17 फरवरी कत्ल कर दिया गया था। 18 फरवरी को उसका पुलिस ने गुमशुदगी को केस दर्ज किया। जबकि 21 फरवरी को जोगिया कोतवाली क्षेत्र के सजनी-पकड़ी मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारे एक व्यक्ति का शव एक बोरे में बंधा मिला था। हत्या का केस दर्ज करके पुलिस ने एक महिला और पुरुष को पकड़ा था। पूछताछ इनकी पहचान शिखा चौरसिया निवासी बदौली खुर्द थाना बांसी जो जोगिया कोतवाली क्षेत्र के करौंदा मसीना में किराये पर कमरा लेकर रहती थी। इसके अलावा विजय गुप्ता निवासी रानीजोत पोस्ट मस्कनवा थाना छपिया जनपद गोंडा जो लड़की का प्रेमी था। जबकि मृतक प्रशांत गुप्ता शिखा का पूर्व प्रेमी थी। विजय गुप्ता के संबंध की जानकारी मिलने पर पूछताछ में पता चला कि मृतका का लड़की से संबंध और विजय गुप्ता से भी उसके संबंध थे। इसी को लेकर एक वीडियो होने की बात करके ब्लैकमेल करता था। इसीलिए वह दोनों रास्ते से हटाना चाह रहे थे। इसमें तीसरा आयुष उर्फ संगम मिश्र शामिल हो गया। पुलिस के मुताबिक संगम का प्रशांत मित्र था, लेकिन संगम के करीबी से उसके संबंध थे। ऐसा होने की जानकारी पर उसे रास्ते हाटने में शामिल हो गया। इसके बाद तीनों ने मिलकर हत्या कर दी थी। सनसनी फैला देने वाले इस हत्याकांड में प्रेमी और प्रेमिका दोनों दबोच लिए गए थे। लेकिन तीसरा आरोपी हाथ नहीं लगा। पुलिस सूत्रों की माने तो तीसरे आरोपी का मोबाइल लोकेशन मिला था। उसके संभावित ठिकानों पर छापा मारा, लेकिन भनक लगने के कारण स्थान बदल दिया था।
कैसे की गई थी हत्या
17 फरवरी को शिखा चौरसिया ने प्रशांत कुमार गुप्ता को अपने किराये के कमरे पर करौंदा मसीना बुलाया और कहा कि कुछ बात करनी है। उससे पहले प्रेमी विजय गुप्ता और आयुष उर्फ संगम मिश्र पहुंच चुके थे। वह लोग बाहर छिपकर प्रशांत का इंतजार कर रहे थे। प्रशांत पहुंचा और कमरे में चला गया। अंदर चले जाने के कुछ समय बाद प्रशांत को किसी का फोन आ गया। इसलिए वह बाहर आया तो वह बात करते हुए दरवाजा खोलकर बाहर निकला, तब चुपके से विजय गुप्ता और आयुष कमरे के अंदर जाकर छुप गए। प्रशांत के वापस आने पर गमछे से उसका मुंह बंदकर दिए और लोहे की रॉड से उसके सिर पर कई वार किया तथा गमछे से उसका गला दबाकर तबतक खींचते रहे, जब तक की उसकी मृत्यु नहीं हो गई। शिखा मृतक के पैर पकड़ कर स्थिर रखी थी। रात में ही तीनों ने बाइक पर से ले जाकर उसकी लाश को सड़क के किनारे जोगिया-उसका मार्ग पर फेंक दिया।
हत्याकांड में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है। तीसरे की तलाश लगातार चल रही है। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
रोहित उपाध्याय, थानाध्यक्ष उसका बाजार