फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नगर पालिका के नाम नहीं है अंत्येष्टि स्थल

विज्ञापन
विज्ञापन
नगर पालिका के नाम नहीं है अंत्येष्टि स्थल
विज्ञापन

नगर पालिका ने तीन वर्ष पहले काश्तकार को दिया था 43 लाख मुआवजा
राजस्व अभिलेखों में नगर पालिका की जगह अब भी दर्ज है काश्तकार का नाम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिस अनियमितता के मामले में नगर विकास विभाग के विशेष सचिव ने नगर पालिका अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस दिया है, उसमें एक और मामला है। पिठनी पुल के पास अंत्येष्टि स्थल निर्माण के लिए जिस भूमि का नगर पालिका ने 43.66 लाख रुपये मुआवजा दिया, वह भूमि तीन वर्ष बाद भी राजस्व अभिलेख में काश्तकार के नाम से ही दर्ज है। ऐसे में मुआवजा मिलने के बावजूद काश्तकार कुछ वर्षों बाद उक्त भूमि पर दावा कर सकता है।
नगर पालिका सिद्धार्थनगर ने पिठनी पुल के पास गाटा संख्या 58 पर अंत्येष्टि स्थल के निर्माण के लिए अनुमति ली थी, लेकिन उसने बगल में स्थित काश्तकार सरोश अहमद की भूमि गाटा संख्या 179 पर निर्माण करा दिया। इसके बाद काश्तकार सरोश अहमद ने निर्माण कार्य के ध्वस्तीकरण अथवा मुआवजा पाने के लिए हाईकोर्ट में वाद दाखिल कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन डीएम कुणाल सिल्कू ने पांच अप्रैल 2018 को मामले का निस्तारण किया। इसमें दोनों पक्षों में हुए समझौते के आधार पर नगर पालिका को काश्तकार की भूमि का मुआवजा देने पर सहमति बनी। इसके बाद तहसीलदार नौगढ़ ने 16 अप्रैल 2018 को 43.66 लाख मुआवजा बनने की रिपोर्ट दी, जिस पर नगर पालिका ने काश्तकार को धनराशि की भुगतान की। अब मामला यह है कि जिस गाटे की भूमि पर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण हुआ और जिसका मुआवजा काश्तकार को दिया गया, वह भूमि राजस्व अभिलेखों में अब भी काश्तकार के नाम से दर्ज है। अधिवक्ता प्रशस्ति उपाध्याय का कहना है कि बिना भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया किए अथवा रजिस्ट्री बैनामा कराए काश्तकार को भूमि का मुआवजा दिए जाने का औचित्य नहीं था। भविष्य में अगर काश्तकार अथवा उसके परिजन राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि पर दावा करें तो विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विज्ञापन

राजस्व विभाग करता है भूमि अधिग्रहण
नगर पालिका अधिनियम में बोर्ड के कार्य में भूमि अधिग्रहण शामिल नहीं है, यह कार्य राजस्व विभाग की तरफ से किया जाता है। साथ ही मुआवजा के निर्धारण प्रक्रिया भी राजस्व विभाग की ओर से पूरी की जाती है। काश्तकार की निजी भूमि का मुआवजा भुगतान करने एवं उस भूमि अधिग्रहीत करने में नगर पालिका ने नियमों का पालन नहीं किया।
सांसद ने की थी 12 बिंदुओं की शिकायत
सांसद जगदंबिका पाल ने सभासद अमित सिंह श्रीनेत के प्रार्थना पत्र के आधार पर नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं अनियमिता से संबंधित 12 बिंदुओं की शिकायत शासन में की थी। इसमें हाइडिल तिराहे से पेट्रोल पंप तक सड़क चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण कार्य के निविदा प्रक्रिया में अनियमितता करने समेत कई आरोप लगाए गए हैं।
विज्ञापन

कोट
जिस भूमि का नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर की ओर मुआवजा दिया जा चुका है, उस भूमि के नामांतरण कराने के नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। जल्द ही नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-विकास कश्यप, एसडीएम व प्रभारी ईओ नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें