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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में न लैब, न टेक्नीशियन, दांत का इलाज मुश्किल

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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में न लैब, न टेक्नीशियन, दांत का इलाज मुश्किल
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सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज में दांत के मरीजों के इलाज की बेहतर सुविधा नहीं है। एक्स-रे कराने के लिए बाहर जाना पड़ता है। यहां दांत के डॉक्टर मरीजों को सिर्फ दर्द से राहत की दवा दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में दांत निकालने और सर्जरी कराने के लिए मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं की दरकार है। डेंटल ओपीडी में प्रतिदिन 30-40 मरीज पहुंच रहे हैं। एक्स-रे नहीं होने के कारण दांत के अंदर के संक्रमण और जख्म की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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मजबूरी में दांत के डॉक्टर ऐसे मरीजों को संक्रमण रोकने और दर्द दूर करने की दवा देकर लौटा रहे हैं। सुविधाओं के अभाव में दांत के ओपीडी में मरीजों की संख्या भी कम हो गई है, जबकि डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रो. डॉ. शिल्पी गंगवार एवं दो जूनियर रेजीडेंट की नियुक्ति हो चुकी है। डॉक्टर मरीज देख रहे हैं, मगर संसाधनों के अभाव में मरीजों को पूरी तरह राहत नहीं मिल पा रही है।
डेंटल डिपार्टमेंट में रेडियोलॉजी की लैब नहीं है। एक्स-रे मशीन है, लेकिन एक्स-रे प्लेट नहीं होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। दांत के इलाज में उपयोगी उपकरणों का भी अभाव है। फिलहाल एक्स-रे टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हुई है। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि डेंटल डिपार्टमेंट में कई महीनों से विभागीय डॉक्टर और टेक्नीशियन नहीं थे, प्रयोग नहीं होने के कारण एक्स-रे मशीन भी खराब हो गई है। टेक्नीशियन आएंगे तो उसे चेक कराकर मरम्मत कराएंगे।
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इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने कहा कि डेंटल डिपार्टमेंट की ओपीडी में डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं। एक्स-रे प्लेट सहित अन्य उपकरणों की मांग के अनुसार सप्लाई के लिए आर्डर दिए गए हैं। जल्द ही डेंटल डिपार्टमेंट में सर्जिकल ट्रीटमेंट शुरू होगा।
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