चोरी की नौ बाइक बरामद, दो गिरफ्तार
सिद्धार्थनगर। एसओजी और बांसी पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार को दो वाहन चोर को दबोचा। उनके निशानदेही पर चोरी की नौ बाइक बरामद की। एक तंमचा और कारतूस भी बरामद किया। पुलिस ने उन्हें बांसी कोतवाली क्षेत्र के मिठवल रोड से पकड़ने के बाद जेल भेज दिया।
रविवार को पुलिस लाइंस सभागार में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एएसपी सुरेश चंद रातव ने बताया कि वाहन चोरी की घटनाओं का पर्दाफाश करने के लिए एसओजी टीम को लगाया गया था। सुबह मुखबिर से सूचना मिली की वाहन चोरी करने वाले गिरोह के दो गुर्गे बांसी कोतवाली क्षेत्र के मिठवल रोड मोड़ के पास आने वाले हैं। सूचना को संज्ञान में लेते हुए एसओजी प्रभारी जीवन त्रिपाठी, कोतवाल बांसी छत्रपाल सिंह की अगुवाई में टीम तैयार की गई। इसके बाद बताए हुए स्थान पर पुलिस टीम पहुंच गई। एक बाइक सवार संदिग्ध को पकड़ा गया। उसके कब्जे से एक तमंचा और कारतूस बरामद किया गया। जांच में बाइक चोरी की निकली। पूछताछ में उसने अपना नाम अरुण पासवान निवासी देवधरिया थाना बांसी बताया। कड़ाई से पूछताछ में उसकी निशानदेही पर रशीद निवासी भतीजवापुर थाना बांसी के कब्जे से आठ अन्य बाइक बरामद की गई। इसमें तीन बांसी मोहल्ले से चोरी हुई थी। पूछताछ के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। पकड़ने वाली टीम में कोतवाल बांसी छत्रपाल सिंह, निरीक्षक देवानंद उपाध्याय, एसओजी प्रभारी जीवन त्रिपाठी, एसआई रामप्रकाश चंद, आरक्षी मधुसुदन यादव, उपेन्द्र प्रजापति, सुनील कुमार मौर्य, नौमी नाथ यादव, अखिलेश यादव ,राजीव कुमार शुक्ला, रमेश यादव, वीरेंद्र त्रिपाठी, पवन तिवारी, वनीश सिंह, मृत्युंजय कुशवाहा शामिल रहे।
नशे की लत ने वाहन मिस्त्री से बना दिया चोर
पुलिस के मुताबिक अरुण पासवान बाइक का अच्छा मिस्त्री है। वह पहले मिठवल बाजार में बाइक मैकेनिक का कार्य करता था। इसके बाद आजमगढ़ गया। वहां भी मैकेनिक का कार्य करता था। नशे में पड़ने के कारण वह बाइक का पार्ट इधर-उधर करने लगा। इसके बाद सोचा बाइक चोरी करें तो अच्छी कमाई होगी। इसके बाद बाइक चोरी करने लगा। आजमगढ़ में बाइक चोरी के मामले में इसकी जानकारी पुलिस एकत्र कर रही है।
नंबर प्लेट बदलकर बेचता था बाइक
अरुण बाइक चोरी कर उसके पार्ट और नंबर प्लेट बदलकर बेचत था। इसके पीछे कारण की कोई परख न पाए की बाइक चोरी की है। बाइक चोरी में उसके मैकेनिक होने का लाभ मिलता था। बाइक तैयार करने के बाद आसानी से बेच लेता था और किसी को पता नहीं चलता था। पुलिस यह भी जानकारी करने में जुटी है कि उसने बाइक कब-कब चोरी की है।