नदियों के उफान से ग्रामीण भयभीत
सिद्धार्थनगर। राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से जिले में बाढ़ का तांडव चरम पर है। कई गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी घिरे हैं। रास्ते पर दो से पांच मीटर तक पानी बह रहा है, बांधों पर बाढ़ के पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है। कई जगहों पर रिसाव शुरू हो गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोग सहमे हुए हैं।
जिले में राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी का कहर जारी ही है। जमुआर, कूड़ा, घोघी, तेलार का भी जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। जमुआर नाले में उफान होने से शहर के पास नौगढ़-सोहांस मार्ग पर दो फीट से अधिक पानी बढ़ने से आवागमन बंद हो गया है। सोहांस एवं लोटन क्षेत्र के लोगों का जिला मुख्यालय आना मुश्किल हो गया है। रास्ती और बूढ़ी राप्ती के कई दिनों से बढ़ रहे जलस्तर से उसका, शोहरतगढ़, इटवा, डुमरियागंज आदि क्षेत्र के कई गांव पानी से घिरे हुए है। इन गांव के लोगों को घर से निकलने के सिर्फ नाव का सहारा है। लोगों के घर के साथ ही स्कूल आदि सार्वजनिक स्थलों पर पानी भरा हुआ है।
उसका बाजार प्रतिनिधि के अनुसार नगर क्षेत्र के चौबाहे और रेहरवा गांव में सड़क पर पानी चढ़ जाने से उसका से धर्मसिंहवा जाने वाला मार्ग बंद हो गया है। उसका क्षेत्र के दर्जनों प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय बाढ़ की पानी से घिर गए हैं। कूड़ा नदी खतरे के निशान से शनिवार से ही ऊपर बह रही है। क्षेत्र के अजिगरा, हथिवड़ताल, करछुलिया, नगवां, फुलवरिया, चनरैया आदि गांव बाढ़ से प्रभावित हो गए हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय अजिगरा एवं प्राथमिक विद्यालय चौबाहेडीह आदि में पानी भर गया है।
परसा प्रतिनिधि के अनुसार बूढ़ी राप्ती नदी में आई बाढ़ से शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के करीब आठ ग्राम सभाओं के दो दर्जन टोलों को आगोश में ले लिया है। इन गांवों की 30 हजार से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं। सड़कों पर बाढ़ के पानी के बहने के कारण आधा दर्जन से अधिक मार्गों पर आवागमन बंद है। हजारों एकड़ धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है।