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नदियों में उफान से कई गांव बने टापू, बांधों पर बढ़ा खतरा

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नाव पर बैठ घर का सामान लेने जाती डुमरियागंज क्षेत्र के बड़हरा गांव की महिलाएं। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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नदियों में उफान से कई गांव बने टापू, बांधों पर बढ़ा खतरा
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सिद्धार्थनगर। जिले में लगातार बढ़ रहे नदियों के जलस्तर से हाहाकार मच गया है। पिछले 10 साल के रिकार्ड को तोड़ते हुए बूढ़ी राप्ती खतरे के लाल निशान से डेढ़ मीटर ऊपर बह रही और राप्ती नदी भी 68 सेमी ऊपर पहुंच गई है। यहां तक कि कूड़ा, घोघी और तेलार भी खतरे के निशान को पार कर गई है। इससे कई गांव टापू में बदल गए हैं और बांधों पर खतरा मंडराने लगा है।
बूढ़ी राप्ती नदी के उफान से उसका एवं जोगिया क्षेत्र के कई बाढ़ से घिर गए हैं, वहीं राप्ती नदी में उफान से डुमरियागंज और बांसी क्षेत्र के कई गांव टापू में बदल गए हैं। उसका क्षेत्र के हथिवड़ताल गांव के तिवारीपुर समेत कई टोले पानी से कई दिन से घिरे हुए हैं। इन गांवों तक आने-जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
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डुमरियागंज प्रतिनिधि के अनुसार, बृहस्पतिवार की भोर में गांव के बाद राप्ती नदी के बाढ़ का पानी नगर का रुख कर दिया है। डुमरियागंज नगर से सटे ग्राम पंचायत रमवापुर उर्फ नेबुआ का राजस्व गांव बड़हरा टापू में तब्दील हो चुका है। गांव में आने जाने का एक मात्र रास्ता पानी में डूब चुका है। वहीं प्रशासन की ओर से राहत सामग्री नहीं पहुंचाए जाने से कई बाढ़ पीड़ित गांव के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। डुमरियागंज-चंद्रदीपघाट मार्ग पर स्थित सीओ आफिस के सामने, सहियापुर मंडी समिति और रमवापुर उर्फ नेबुआ गांव के बीच शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर भी तेजी से राप्ती का पानी भरने लगा है। वहीं बड़हरा गांव और राप्ती नदी के बीच कोई बांध न होने के कारण उसके चारों ओर बाढ़ का पानी भर गया है। लोग अपने गांव से बमुश्किल ही निकल पा रहे हैं।
महिलाएं और बच्चे तो गांव में कैद होकर रह गए हैं। इतना ही नहीं बैदौला-औसानपुर मार्ग पर स्थित कर्बला के पास करीब चार फिट पानी भर गया है। उसके चलते लोग पानी में घुसकर आने-जाने के लिए विवश हैं। क्षेत्र के भोला, बब्लू मिश्रा, रामप्रसाद चौधरी, मुंशी, भगेलू, कामता प्रसाद आदि ने कहा कि पानी गांव में घुसने से अब रोटी के भी लाले पड़ने लगे हैं। हर जगह से संपर्क टूट चुका है। प्रशासन की ओर से भी कोई मदद नहीं पहुंचाई गई है। लोगों ने जल्द से जल्द राहत सामग्री वितरित करवाने की मांग की है। बड़हरा गांव के सहदेव, भोला, प्रकाश और उमेश ने बताया कि गांव के 80 फीसदी लोग मजदूरी करते हैं। जिससे शाम को घर लौटने में जान जोखिम में डालना पड़ता है। कभी तो नाव नहीं मिलने से उन्हें पानी के अंदर से जाना पड़ता है।
ग्राम प्रधान शिवपूजन ने बताया कि ग्रामीणों को सुविधा के नाम पर प्रशासन ने सिर्फ एक नाव दिया है। उसी से लोग गांव के बाहर आ-जा रहे हैं। एसडीएम त्रिभुवन ने बताया कि बाढ़ पीड़ित गांवों के लोगों में राहत सामग्री बंटवाई जा रही है। बड़हरा गांव में भी लेखपाल को भेजकर बाढ़ का जायजा लेकर वहां के लोगों को भी राहत सामग्री दी जाएगी।
जुडवनिया में राहत सामग्री की दरकार
भनवापुर। जुड़वनिया गांव राप्ती नदी से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। बाढ़ का पानी आने से 10 दिनों से कई घर व प्राथमिक विद्यालय में पानी भरा है। बाढ़ से निजात के लिए कब निजात मिलेगी, हर कोई ग्रामीण आस लगाए बैठा है। गांव के सलीम, जगलाल, जगदेव, दुखरन आदि के घर में बाढ़ का पानी भरा हुआ है और अभी तक राहत सामग्री ग्रामीणों को नहीं मिली है। 10 दिन से ग्रामीणों को बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि शव जलाने के लिए सूखी जगह नहीं मिल पा रही है। कब्रिस्तान में पानी भरा है जिसके कारण एक परिवार के मृत्यु हो जाने पर शव को 10 किलोमीटर दूर बिजौरा गांव के कब्रिस्तान में दफन किया गया।
रसूलपुर गांव बाढ़ के पानी से हुआ जलमग्न
डुमरियागंज। बाढ़ बैदौला बांसी मार्ग पर बसे रसूलपुर गांव का तहसील और जिले का संपर्क कट गया है लोग कमर भर पानी में होकर आ जा रहे हैं। शुक्रवार की रात भारी बारिश ने गांव को टापू में बदल गया है। गांव में जहां भी नजर दौड़ाएं सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है पानी में घुसकर लोग अपनी जरूरत के लिए आ-जा रहे हैं। ग्राम प्रधान इश्तियाक अहमद ने बताया कि गांव में बाढ़ और बारिश के पानी से सैकड़ों बीघा किसानों की धान की फसल पूरी तरह से डूब कर बर्बाद हो गई है। अभी तक गांव में किसी प्रकार की राहत और मददगार प्रशासन की ओर से नहीं की गई है।
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कई विद्यालयों में घुसा पानी
शोहरतगढ़। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश और नदियों व नालों में उफान से शोहरतगढ़ क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुहमुनवा, महमुदवा ग्रांट, लेदवा, प्राथमिक विद्यालय महमूदवाग्रांट तथा बढ़नी विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय पकड़िहवा, प्राथमिक विद्यालय रामनगर, खैरी शीतल प्रसाद के प्राथमिक विद्यालय टीकर, तौलिहवा के इटहिया, प्रतापपुर व बाला नगर,मटियार उर्फ भुतहवा में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय समेत कई विद्यालयों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कंपोजिट विद्यालय लेदवा की चहारदीवारी भी क्षतिग्रस्त हो गई। इन विद्यालयों के बच्चों को पठन-पाठन के लिए शिक्षा विभाग किसी सुरक्षित स्थान को खोजने में लगा हुआ है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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