‘हित को ध्यान में रखकर तालिबान से बात करे भारत’
कपिलवस्तुु (सिद्धार्थनगर)। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में अफगानिस्तान संकट का वर्तमान परिप्रेक्ष्य और भारत की चुनौती विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रति कुलपति एवं स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में अमेरिकन स्टडी सेंटर के प्रोफेसर डॉ. चिंतामणि महापात्र ने कहा कि वर्तमान अफगानिस्तान संकट के संबंध में भारत को यथार्थवादी कूटनीति को अपनाना चाहिए। जिस तरह परिस्थितियां बदली हैं पाकिस्तान और चीन की नजदीकी तालिबान शासन से हुई है। उस परिप्रेक्ष्य में भारत को भी भारतीय हित को ध्यान में रखते हुए तालिबान से बातचीत करनी चाहिए।
कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की राजनीत विभाग के प्रोफेसर एवं अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ डॉ. तेज प्रताप सिंह ने कहा कि सैकड़ों वर्ष पूर्व में सिकंदर अफगानिस्तान में ही परास्त हुआ और वापस अपने देश नहीं लौट पाया। ब्रिटिश अंपायर जब चरम पर था तो अभी अफगानिस्तान पर ग्रेट गेम के अंतर्गत कब्जा करना चाहता था ,उसकी भी हार हुई और धीरे-धीरे ब्रिटिश अंपायर कमजोर हो गया। अध्यक्षता करते हुए सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि भारत ने हमेशा ही तालिबान को आतंकवादी माना है, लेकिन बदलते परिवेश में भारत को तालिबान के साथ बातचीत बढ़ानी चाहिए।
डॉ. सुरेश नारायण सिंह, डॉ. डीएन पांडेय, डॉ. एस कुमार, डॉ. मिथिलेश त्रिपाठी, दीपक प्रताप सिंह, डॉ. कीर्ति, डॉ. कन्हैया, डॉ. अनीता यादव, आभा द्विवेदी, डॉ. वंदना गुप्ता शामिल रही। संचालन संयोजक डॉ. अनुज प्रताप सिंह तथा आभार ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ सरिता सिंह ने किया।