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दर्शन-पूजन कर राज्यपाल ने जाना बौद्ध धर्म का मर्म

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दर्शन-पूजन कर राज्यपाल ने जाना बौद्ध धर्म का मर्म
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नेपाल के लुंबिनी में स्थित भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों को देखा
संवाद न्यूज एजेंसी
कपिलवस्तु/सिद्धार्थनगर। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को भगवान बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुंबिनी में स्थित बौद्ध धर्म से जुड़े मठों और गुंबा आदि का दर्शन व पूजन किया। राज्यपाल ने यहां करीब छह घंटे गुजारे। उन्होंने सर्वाधिक समय भगवान बुद्ध की मां के नाम से स्थापित माया देवी मंदिर में गुजारा। गर्भगृह के बारे में विस्तृत पूछताछ की। मठों में स्थापित प्रतिमाओं एवं चित्रों के साथ ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी ली और बौद्ध धर्म के मर्म को जाना।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल हेलीकाप्टर से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु परिसर में सुबह 10 बजे उतरने के बाद नेपाल के लुंबिनी के लिए रवाना हो गईं। लुंबिनी 11 बजे पहुंचीं। मायादेवी मंदिर पहुंचते ही लुंबिनी विकाष कोष के कार्यकारिणी सदस्य राजेश ज्ञावाली सहित कर्मचारियों ने भगवान बुद्ध की मूर्ति भेंटकर उनका स्वागत किया। राज्यपाल ने भगवान बुद्ध (बचपन का नाम सिद्धार्थ) की जन्मस्थली गर्भगृह और अशोका स्तंभ पर शांति दीप जलाकर दर्शन-पूजन किया। उन्होंने आसपास स्थित बर्मा टेंपल, गोल्डेन टेंपल, कंबोडिया, थाइलैंड, जर्मन मंदिरों एवं शांति स्तूप का भी दर्शन व पूजन किया। इस बीच लुंबिनी विकास के सूचना प्रमुख हरिध्वज राई ने भगवान बुद्ध के जन्म और उनके बचपन से संबंधित क्रिया कलापों को अवगत कराया। नेपाल सीमा से अंदर जाने के लिए नेपाल में भारतीय दूतावास के अशोक कुमार एवं नेपाल के सुरक्षा कर्मी उनके साथ थे। राज्यपाल शाम पांच बजे कपिलवस्तु लौट गईं। इस मौके पर डीएसपी शोभनाथ खनाल, नेपाल के रूपनदेही प्रहरी पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार केसी, एपीएफ निरीक्षक प्रवीण फुयाल, थानाध्यक्ष लुंबिनी युवराज जंग कर्की, चौकी इंचार्ज काली दह तारा बहादुर छहरी आदि मौजूद थे।
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मंदिर के बाहर बैठकर की चर्चा
कपिलवस्तु। मायादेवी मंदिर में दर्शन पूजन के बाद वह बाहर बेंच पर बैठकर लोगों से गुजराती भाषा में चर्चा करतीं दिखीं। राज्यपाल ने साथ में आए लोगों से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली पर स्थापित ऐतिहासिक मंदिरों की जानकारी ली। इस बीच लुंबिनी में कुछ यात्रियों से मिलकर उनका कुशल क्षेम पूछा। मंदिर के अंदर छोटी सी दुकान चलाने वाली महिला से भी स्थानीय सुविधाओं की जानकारी ली। उनके साथ गुजरात से आठ लोगों के अलावा 35 लोग दर्शन के दौरान मौजूद थे।
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चाइना मंदिर और म्यूजियम पहुंची राज्यपाल
ककरहवा। राज्यपाल जब म्यूजियम पहुंचीं तो वहां निर्माण कार्य चल रहा था। अवलोकन योग्य कुछ नहीं मिलने पर उन्होंने वहां से चलने के लिए कहा। लोगों ने बताया कि यहां निर्माण चल रहा है, इसलिए ऐतिहासिक वस्तुएं एकत्रित कर रख दी गई हैं। निर्माण के बाद इन्हें उचित स्थान पर रखा जाएगा। इसके बाद वह चीन के मंदिर पहुंची। यह मंदिर भी बंद मिला। लोगों ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान बंद हुआ था। अभी तक नहीं खुला।
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लखनऊ के कुक ने बनाया भोजन
लुंबिनी में बौद्ध मठों के दर्शन के बाद उन्होंने एक होटल में खाना खाया। होटल में लखनऊ से आए कुक ने उनकी पसंद का व्यंजन बनाया था। राज्यपाल ने साथ आए लोगों एवं सहकर्मियों के साथ लगभग एक घंटे गुजारे।
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दीक्षांत कार्यक्रम में परिवर्तन
सूचना जनसंपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने बताया कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में पांच दिसंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह के समय में परिवर्तन किया गया है। कार्यक्रम अब 12 बजे के स्थान पर 11 बजे से शुरू होगा। राजभवन द्वारा राज्यपाल के कार्यक्रम में परिवर्तन की सूचना आई है।
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मंडलायुक्त, डीएम ने किया स्वागत
हेलीकाप्टर से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु पहुंचने पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का हेलीपैड पर कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव, मंडलायुक्त गोविंद राजू एनएस, आईजी राजीव मोदक, डीएम दीपक मीणा, एसपी डॉ. यशवीर सिंह द्वारा पुुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया। इसके बाद वह बौद्ध तीर्थ लुंबिनी के लिए प्रस्थान कर गईं।
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