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हर तीसरी गर्भवती है जोखिम पूर्ण प्रसव की सूची में

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हर तीसरी गर्भवती है जोखिम पूर्ण प्रसव की सूची में
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सिद्धार्थनगर। जिले में हर तीसरी महिला का नाम जोखिम पूर्ण प्रसव की सूची में है। खून की कमी के अलावा थायरायड, ब्लड प्रेशर व अन्य बीमारियों का इलाज गर्भावस्था में शुरूआती दौर में नहीं होने से दिक्कत बढ़ जाती है। ऐसी महिलाओं के प्रसव के दौरान डॉक्टरों के सामने जच्चा-बच्चा की जान बचाने की चुनौती होती है। ऑपरेशन से प्रसव कराने की नौबत आई तो उनके लिए रक्त का इंतजाम करना पड़ता है।
जिले में दो माह में 10710 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन हुआ, जिनमें 3360 महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन 7.1 से 10.9 प्रतिशत तक रहा। गर्भवती महिलाओं में 314 महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात प्रतिशत से कम है। इनमें से 113 महिलाओं का समय से इलाज होने का रिकॉर्ड उपलब्ध है।
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प्रसव पीड़ा होने पर गंभीर स्थिति में महिलाएं अस्पताल पहुंचती हैं तो जान पर जोखिम बन जाता है। गर्भवती महिलाओं के शरीर में 11 प्रतिशत से कम हीमोग्लोबिन है तो उसके प्रसव को जोखिम पूर्ण माना जाता है। हीमोग्लोबिन आठ प्रतिशत से कम है तो ऑपरेशन से प्रसव में उसे रक्त चढ़ाना पड़ता है। कोरोना संक्रमण काल में जांच में कमी आई थी, जबकि अब जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
महिला और आशा कार्यकर्ता को इनाम
सरकारी अस्पतालों में प्रत्येक माह नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है, जिनमें महिलाओं की जांच की जाती है। गंभीर स्थिति होने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है। अब माह की 24 तारीख को प्रथम संदर्भ इकाई में जांच की सुविधा शुरू की गई है। जिले के उसका, मिठवल, इटवा, शोहरतगढ़ एवं बेवां, डुमरियागंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रथम संदर्भन ईकाई बनाई गई है। गर्भवती महिला जोखिम पूर्ण प्रसव के अंतर्गत है तो टीकाकरण की तिथि में वह नहीं पहुंचती है तो उसे फोन करके बुलाया जाता है। उसके बाद ऐसे केस में कमी प्रत्याशित नहीं आई है। जिला परामर्शदाता मातृत्व स्वास्थ्य प्रमोद संत ने बताया कि जोखिम पूर्ण प्रसव के केस में गर्भवती का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता अस्पताल में गर्भवती महिला को लेकर पहुंचाती हैं तो उन्हें तथा गर्भवती महिला को 100 रुपये दिए जाते हैं।
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जच्चा-बच्चा की जान बचाने की चुनौती
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उसका बाजार में कार्यरत गायनिक सर्जन डॉ. शिल्पी रावत ने बताया कि जोखिम पूर्ण केस में महिला की गर्भावस्था में इलाज से प्रसव के मौके तक स्थिति में सुधार हो जाता है। गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच करानी चाहिए। इनमें खून की कमी, थायरायड सहित अन्य गंभीर बीमारियां भी हैं। महिला के शारीरिक कारणों से भी प्रसव जोखिम पूर्ण हो जाता है। समय पर जांच होने से जोखिम कम हो जाता है।
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