रेलवे स्टेशन परिसर में ठंड से बचने के लिए आग के पास खड़े लोग।
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ठंड व कोहरे का असर जनजीवन पर दिख रहा है। प्रशासन की ओर से ठंड से बचाव के किए जा रहे इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। पिछले आठ दिन से लोग धूप को तरस गए हैं। तापमान 12.11 डिग्री पर पहुंच गया है।
डुमरियागंज से बस्ती की दूरी महज 50 किलोमीटर है। वहां से जाने और आने वाली बसें एक से डेढ़ घंटा लेट आ जा रही है। रविवार को धुंध अधिक होने के चलते लोग दिन में ही अपने वाहनों की लाइट जलाकर आवागमन करते हुए दिखाई दिए।
प्रशासन द्वारा क्षेत्र में अलाव जलाने और कंबल वितरण करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत रिक्शा चालक और दिहाड़ी मजदूरों को हो रही है। उन्हें इस सर्द मौसम में भी खुले आसमान के नीचे मेहनत करनी पड़ रही है।
रविवार को सुबह में तापमान 9 से 8 डिग्री तक रिकॉर्ड किया गया व दोपहर में तापमान 12 से 13 डिग्री तापमान रहा। सुबह शाम को कोहरे का प्रकोप अधिक होने के चलते लखनऊ, गोंडा, गोरखपुर से डुमरियागंज के लिए आने वाली परिवहन और निजी बसे देरी से पहुंचीं।
गर्म कपड़ों की मांग बढ़ी
डुमरियागंज कस्बे में रेडीमेड के कारोबारी ऑबिस रिजवी, रवि अग्रहरि, मनोज, मोतीगंज के शमीम अहमद ने बताया कि ठंड का बाजार चंद दिनों का होता है। एक दो दिन ऐसे ही ठंड रहे तो गर्म वस्त्र का सारा स्टॉक समाप्त हो जाएगा। ठंड के चलते एकाएक लकड़ी के कोयला व हीटर की भी मांग बढ़ गई है। आम दिनों में 35 रुपये में बिकने वाला कोयला का दाम 40 से 45 प्रतिकिलो तक पहुंच गया है। वहीं हीटर के बिक्री में भी जबरदस्त उछाल आया है।