श्रावस्ती। एक वर्ष के अंदर रासायनिक खाद के दाम 40 फीसदी तक बढ़ गए। इसके बावजूद जिले में रासायनिक खादों की उपलब्धता मांग के सापेक्ष कम है। महंगी लागत के बाद होने वाली फसल अब किसानों को पहले जैसा मुनाफा नहीं दे पा रही है।
रासायनिक खाद का प्रयोग करने से जमीन की उर्वरा शक्ति अब उसी पर निर्भर हो गई है। इसलिए किसानों के सामने एक तरह की मजबूरी है कि वह रासायनिक खाद का उपयोग करें। यदि किसानों की मांग को देखा जाए तो तराई वाले इस जिले में सबसे अधिक मांग एनपीके खाद की है। इसी के साथ ही डाई व यूरिया की भी मांग है। लेकिन एनपीके को प्राथमिक रासायनिक खाद माना जाता है। जिसे बोआई के समय जमीन में डालना ही पड़ता है। लेकिन खाद की कीमत आसमान छू रहे हैं। यदि एक वर्ष के अंदर खाद की कीमतों पर आई वृद्धि पर नजर डाली जाए तो लगभग 40 फीसदी तक खाद के दाम बढ़े हैं। लेकिन इसके सापेक्ष उत्पादन व उससे किसानों को होने वाला मुनाफा तेजी से घटा है।
एक वर्ष में एनपीके के दाम (रुपये प्रति बोरी में)
खाद वर्ष 2020 वर्ष 2021
एनपीके 20.20.13 840 1220
एनपीके 10.26.26 1095 1440
एनपीके 12.32.16 1104 1450
फसल बोने का लक्ष्य (हेक्टेअर में)
फसल आच्छादन का लक्ष्य पूर्ति
गेहूं 707784 00
जौ 54 00
मक्का 55 15
योग 7089 3 15
उर्वरक की उपलब्धता (मैट्रिक टन में)
उर्वरक लक्ष्य जिले में उपलब्धता
यूरिया 19000 6485
डीएपी 8100 3696
एनपीके 1200 1086
एमओपी 600 89
एसएसपी 2415 2483
वर्जनसरकारी समितियों के लिए जारी हुआ आदेश
जिले में खाद की बिक्री के लिए सबसे बड़ी एजेंसी सहकारिता है। जिसमें एक पत्र जारी करके सभी समितियों को 15 सितंबर 2021 से बढे़ हुए दामों पर खाद बेचने का आदेश दिया गया है। यही आदेश मौजूदा समय में लागू है। -डॉ. अवधेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी