श्रावस्ती। होली का त्यौहार करीब आने के साथ ही बाजारों में मिलावटखोरी का धंधा जोर पकड़ने लगा है। रोक थाम कार्रवाई न होने से बेखौफ धंधेबाज दूध, खोवा, घी, खाद्य तेल, मसालों के साथ ही घटिया व मिलावटी पनीर तक बाजार में खपा कर तिजोरी भरने में जुटने लगे हैं। चंद सिक्कों की खातिर खाद्य सामग्री में खतरनाक रसायन से लेकर प्रतिबंधित सामग्री मिलाने से जनसमुदाय की सेहत भी दांव पर है। इन मिलावटी खाद्य खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट संबंधी रोगों के साथ त्वचा, गले में खराबी और एलर्जी की परेशानी भी घेर सकती है।
जानकारों की माने तो होली पर सबसे अधिक मिलावट दूध, खोवा, पनीर के साथ ही खुले मसालों व खाद्य तेलों में होती है। रोकथाम के लिए जिम्मेदार एफएसडीए अफसरों की शिथिलता से मिलावटी खाद्य सामग्री की जांच पड़ताल सिर्फ रस्म अदायगी तक सिमटी है। त्योहार को देखते हुए कानपुर व जरवल मंडी से सिंथेटिक खोवा, दूध व अन्य खाद्य सामग्री की आमद भी धड़ल्ले से शुरू हो गयी है। इसके बावजूद एफएसडीए टीमों ने अभी तक नमूना सैंपलिंग व जांच पड़ताल की कार्रवाई शुरू नहीं की है।
अभिहीत अधिकारी सुनील कुमार शर्मा बताते हैं कि मिलावटखोरी पर सुरक्षित श्रेणी में नमूना लैब जांच में फेल होने पर अधिकतम दस लाख रुपया का अर्थ दंड व अनसेफ श्रेणी में नमूना फेल पाए जाने पर उम्र कैद के साथ ही दस लाख तक के जुर्माना का प्रावधान है। अनसेफ श्रेणी का मुकदमा सीजेएम कोर्ट पर चलता है। उन्होंने बताया कि होली के दौरान मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता जांचने के लिए टीम गठित कर दी गयी है। जल्द ही सभी बाजारों में संचालित खोवा व दूध मंडी के साथ अन्य खाद्य सामग्री की दुकानों की जांच पड़ताल होगी।
सरसों के तेल में राइसब्रान और बटल येलो के साथ आर्जीमोन, देशी घी में वनस्पति के साथ चर्बी और ब्यूट्रिरिक एसिड, वनस्पति घी में पामोलीन आयल, हल्दी में लेड आक्साइड, लेड क्रोमेट और पीली मिट्टी, लाल मिर्च में सुडान टू , सुडान थ्री व लाल रंग, धनिया में बटर यलो और ट्रटाजिन, काली मिर्च में लाइट बेरी और पपीते के बीज, राई में राई आर्जीमोन के बीज, दूघ में डिर्जटेंट, यूरिया, कार्बोनेट (खाने का सोडा), फार्मलीन और खराब मिल्क पाउडर जबकि पनीर में शक्करकंदी, आलू व यूरिया को मिला कर बाजार में बेच कर मोटी कमाई की जाती है।
मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन पेट से लेकर दिल तक के लिए खतरा पैदा करता है। चिकित्सकों के अनुसार मिलावटी खाद्य तेलों के सेवन से जहां किडनी, लीवर फेल, हृदय रोग, कोलेस्ट्राल बढ़ने के साथ पेट खराब रहने की तकलीफ बढ़ रही है वहीं मिलावटी मसाले पनीर, दूध भी आंत, हड्डी, ब्रेन, नर्वस सिस्टम के लिए घातक होने के साथ स्किन एलर्जी व अस्थमा की बीमारी का कारण भी बन सकते हैं। सबसे खतरनाक सरसों की राई व तेल में आर्जीमोन की मिलावट होती है। इससे ड्राप्सी के साथ किडनी फेल होने और हार्ट अटैक तक का खतरा रहता है।
अभिहित अधिकारी सुनील कुमार शर्मा बताते है कि नकली खोया देखने में सफेद व चिकना होता है। यह आम खोए से दो सप्ताह से अधिक समय तक उपयोग में लाया जा सकता है। दूध में यदि हल्दी डालकर कुछ देर पकाया जाए और उसका रंग नीला हो जाए तो उसमें डिटर्जेंट होगा, यदि दूध दो दिन तक न फटे तो समझें उसमें फार्मोलिन मिला है। यदि दूध मीठा लगे तो उसमें सक्रीन मिला माना जाए। इसी तरह सब्जी मसालों में यदि प्राकृतिक रंग से अधिक चटक रंग दिखाई दे तो वह मिलावटी आशंकित हो सकता है।