श्रावस्ती। राप्ती नदी का जलस्तर घट रहा है। राप्ती बैराज पर मंगलवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर मापा गया। घटते जलस्तर के साथ कछारवासियों की दुश्वारियां भी कम होने लगी है। लेकिन कटान का खतरा बढने लगा है। राप्ती की बाढ़ से जलमग्न गांवों में लोगों की मदद के लिए एसएसबी व एनडीआरएफ के जवान अब भी मोटर बोट का सहारा ले रहे हैं।
नेपाल सहित पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण राप्ती नदी सहित सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों का जलस्तर बढ़ गया था, जो अब धीरे धीरे घट रहा है। मंगलवार शाम तीन बजे जमुनहा के राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर 127.80 मीटर मापा गया। जो खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर था। राप्ती नदी के खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण राप्ती नदी की कछार में बसे लौकिहा, अशरफ नगर, सधई पुरवा, चहलवा, सुल्तानाजोत, सर्रा, उत्तमापुर, जिगरिया, नरैनापुर, भग्गनपुरवा, ओरीपुरवा, बरंगा, वीरपुर, हरिहरपुर, महाराजनगर, मिसिरपुरवा, पिपरहवा, गुरदत्तपुरवा, बरुहा सहित कई अन्य गांव अब भी जलमग्न हैं। वहीं कई गांव बाढ़ से घिरे हैं, जहां आने जाने के लिए लोगों को छोटी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एसएसबी व एनडीआरफ की टीम मोटर बोट का सहारा ले रही है।
कोदिया गांव में एसएसबी के बचाव एवं राहत दल के सहायक उपनिरीक्षक सुभाष चंद के नेतृत्व में टीम ने बाढ़ में फंसे लक्ष्मणपुर निवासी संदीप यादव, सूरज यादव, मिथिलेश कुमार, मंगतराम यादव, सागरगांव निवासी रामसनेही यादव, लक्ष्मी, मायावती व समीरा व दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालकर कलकलवा मार्जिनल बांध पर पहुंचाया। जिलाधिकारी टीके शिबु ने बताया कि राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर अधिक है। नदी के घटते-बढ़ते जलस्तर पर निगरानी रखी जा रही। सभी बाढ़ चौकी प्रभारियों एवं चौकी पर तैनात अधिकारियों व कर्मचारियों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया है। सभी नोडल अधिकारी एवं उपजिलाधिकारी अपने क्षेत्रों में निगरानी रख रहे हैं।