फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंचायत चुनाव में खिसके जनाधार ने भाजपा की बढ़ाईं मुश्किलें

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रावस्ती। पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के लिए जो जनादेश आया है उससे भाजपा की नींद ही उड़ गई है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा की मुश्किलें भी जिले में बढ़ सकती हैं। यह खतरा तब है जब जिले की दो विधानसभा सीटों में से एक पर बसपा का कब्जा है।
विज्ञापन

पंचायत चुनाव तो बीत गया, लेकिन अपने पीछे 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए कई सवाल छोड़ कर गया है। इन सवालों से भाजपा की नींद उड़ी हुई है तो विपक्ष एक सुनहरा सपना देख रहा है। इस सपने का आधार जिला पंचायत सदस्यों का रिजल्ट है। इस रिजल्ट में 22 सदस्यों वाले जिला पंचायत बोर्ड के लिए भाजपा समर्थित केवल चार उम्मीदवार ही जीत कर आए। इसके अतिरिक्त सभी उम्मीदवार विपक्ष के हैं, जिसमें सबसे अधिक 11 की संख्या समाजवादी पार्टी की है।
ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती खत्म हो रहे जनाधार को वापस लाना है तो सपा को इस नतीजे से मनोवैज्ञानिक लाभ मिल रहा है। ऐसे में दो विधानसभा सीटों वाले इस जिले में स्थिति तब और भयावह हो जाती है जब दो में से एक सीट पर पहले से ही बसपा का कब्जा है। ऐसे में शेष बची एक श्रावस्ती के भाजपा विधायक अपने क्षेत्र में भी पार्टी को बढ़त दिलाना तो दूर उसकी स्थिति को भी मजबूत नहीं रख पाए। यही कारण रहा कि इकौना विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश भाजपा समर्थित उम्मीदवार कहीं तीसरे तो कहीं चौथे स्थान पर रहे। वहीं, जिन सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते हैं, वहां निर्दल (सपा) से उनके वोटों का अंतराल बहुत ही कम रहा। संपन्न हुए पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्यों को देखते हुए भाजपा जहां सत्ता पक्ष के दबाव के साथ चुनाव में अपना अध्यक्ष प्रत्याशी उतारना चाहती है।
विज्ञापन

वहीं विपक्ष एकजुट होकर अपना प्रत्याशी मैदान में उतारने की तैयारी में है। ऐसे में सपा का दावा है कि उसे आज की तिथि में अध्यक्ष की कुर्सी जीतने के लिए मात्र एक सदस्य की ही जरूरत है जबकि भाजपा को संख्या के आधार पर चुनाव जीतने के लिए आठ सदस्यों की आवश्यकता है, लेकिन भाजपा में आंतरिक गुटबाजी इतनी तेज है कि चार सदस्यों में भी आपसी फूट है। संभव है कि यदि प्रदेश की ओर से कोई हस्तक्षेप न हुआ तो यह चारों सदस्य भी बिखर सकते हैं। जिस प्रकार जिले में चार साल की सत्ता व क्षेत्र के विकास के दावे विधायक की ओर से किए गए, वे आज चारों खाने चित्त नजर आ रहे हैं। आज स्थिति यह है कि भाजपा को सत्ता व तोड़फोड़ की राजनीति का सहारा लेना पड़ रहा है। विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल समझा जाने वाला यह चुनाव भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। वहीं, भाजपा हाईकमान जिले के नतीजों को लेकर पशोपेश में है। संभव है भविष्य में विधानसभा के टिकट देते समय इन नतीजों पर भी गौर किया जाएगा। (संवाद)
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें