श्रावस्ती। दीपावली में धंधेबाजों ने सेहत दांव पर लगाने वाले घटिया गुणवत्ता के मिलावटी नेपाली खोवा को जमकर बाजार में खपाया। रोकथाम को जिम्मेदार खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन के अधिकारियों की उदासीनता से दो गुना से अधिक मुनाफे पर यह खोवा बाजारों में खूब बिका। नेपाल से आने वाले घटिया गुणवत्ता के इस मिलावटी खोवा से बनी मिठाइयों ने भी सभी का स्वाद बिगाड़ा। दीपावली के दिन बाजार में भारतीय खोवा जहां 230 रुपया में तो नेपाल से आने वाला मिलावटी खोवा 160 रुपया प्रति किग्रा. की दर से बिका।
त्योहार पर इस बार नेपाल से आने वाले मिलावटी खोवा ने मिठाई खाने के शौकीनों का जायका बिगाड़ दिया। यह पहला मौका था जब नेपाल से आने वाला खोवा भिनगा सहित अन्य बाजारों में खुलेआम बेचा गया। इसके चलते खोवा से बनने वाले मिठाइयां भी अलग अलग दरों पर बाजार में बिकी।
दो गुना मुनाफे का चोखा धंधा
नेपाल के सोनार क्षेत्र में धंधेबाज सेहत के लिए जानलेवा स्तर तक खतरनाक सामग्री की मिलावट से सिंथेटिक खोवा बनाने का कार्य करते हैं। इसमें खोवा बनाने के लिए चीन से आने वाले विशेष मिल्क पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। इस पाउडर को गरम पानी में मिलाने के बाद इसमें सिंथेटिक कलर, पॉम आयल व मिठास बढ़ाने को चीनी पाउडर का इस्तेमाल कर 50 से 60 रुपया में एक किग्रा. खोवा तैयार कर दीपावली के दौरान बहराइच व श्रावस्ती के बाजारो में दो गुना से भी अधिक 150 से 160 किग्रा. तक खपाया गया।
सेहत पर भारी मिलावटी नेपाली खोवा
चिकित्सकों के अनुसार घटिया गुणवत्ता के इस मिलावटी नेपाली खोवा का सेवन प्रमुख तौर पर पेट के पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है। इसके साथ ही शुगर व हार्ट की बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए इसका सेवन जानलेवा तक खतरनाक हो सकता है। ऐसे खोवा में शामिल हानिकारक सामग्री शरीर की रक्त धमनियों में खून का प्रवाह रोक कर हार्ट अटैक का खतरा भी कई गुना तक बढ़ा देती है।
रोकथाम को जिम्मेदार बने रहे उदासीन
त्योहार पर मिलावटी खाद्य सामग्री की रोकथाम को जिम्मेदार खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडी) के अधिकारी पूरे त्योहार के दौरान बस कुछ मिठाई की दुकानों व जनरल स्टोर पर रंगीन कचरी समेत कुछ अन्य खाद्य सामग्री की नमूना सैंपलिंग कार्रवाई तक ही सीमित रहे। इस दौरान कही भी धड़ल्ले से बिक रहे घटिया गुणवत्ता के मिलावटी खोवा को सीज कर नष्ट करने की कोई भी कार्रवाई सामने नही आयी। अभिहित अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि दीपावली पर कई स्थानों पर नमूना लेकर सैंपलिंग की कार्रवाई की गई लेकिन कहीं भी सिंथेटिक मावा नहीं मिला। जहां तक नेपाल से मावा आने की बात है, इसकी जांच अलग से करायी जाएगी।