इकौना (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली स्थित डेन महामंगकोल संस्था के विस्तारवादी नीति के कारण कई गांव के लोग मुसीबत के घेरे में आ गए हैं। संस्था ने सार्वजनिक भूमि पर कब्जे से बची सार्वजनिक भूमि व नाले का विनिमय करने के लिए आवेदन किया है। यदि यह विनिमय किया जाता है तो आसपास के कई गांवों के जलमग्न होने का खतरा पैदा हो जाएगा।
बौद्ध पर्यटन स्थल श्रावस्ती में कई देशों की वास्तु कला समेटे मंदिर हैं। इन सब ट्रस्टों को सरकार ने एक निश्चित मात्रा में भूमि खरीद कर मठ स्थापित करने की अनुमति दे रखी है।
इन्हीं में से एक थाईलैंड के महामंगकोल छाय धम्मा ट्रस्ट की विस्तारवादी नीति स्थानीय लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है। 1983 में श्रावस्ती आए इस ट्रस्ट को ध्यान साधना व बौद्ध स्तूपों की स्थापना करने की अनुमति दी गई थी। धीरे धीरे इस ट्रस्ट ने आसपास की जमीनों को खरीदना शुरू कर दिया। इसी विस्तारवादी नीति के चलते ट्रस्ट ने पहले ही 0.173 हेक्टेअर चकरोड की जमीन को ट्रस्ट की बाउंड्रीवाल के अंदर कर लिया। राजस्व विभाग में बाद में इसका मूल्यांकन करके 43 लाख रुपये की रिकवरी का नोटिस भी दिया। पूरा मामला निस्तारण में फंसा है। इतना ही नहीं प्राकृतिक घोला व सड़क की भूमि का विनिमय करते समय भी कुछ शर्तें तय हुई थी। इसमें प्रमुख तौर पर ट्रस्ट को जल निकासी व सार्वजनिक रोड को जैसा है वैसा ही दूसरे स्थान पर बनाकर देना था। इसके बावजूद संस्था द्वारा इसकी अनदेखी करने पर 3.96 करोड़ का जुर्माना भी ट्रस्ट पर लगा था। दबाव के चलते यह आदेश भी फाइलों में बंद है।
इससे बेखौफ ट्रस्ट संचालकों ने बीते दिनों गाटा संख्या 548 जो करीब 2 किमी का सार्वजनिक रास्ता (चकमार्ग) है और कटरा बाजार से चक्रभंडार गांव को जोड़ता है और गांव के लोगों का मुख्य निकास है के साथ ही गाटा संख्या 616 सार्वजनिक तालाब व गाटा संख्या 614 खलिहान की भूमि के साथ ही पर्यटन विभाग को दी जा चुकी जमीन को हथियाने के लिए विनिमय के तहत शासन स्तर पर आवेदन किया है। यदि यह भूमि ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में चली जाती है तो चक्रभंडार कटरा सहित कई गांवों की निकासी बंद हो जाएगी। यही नहीं राप्ती नदी में बाढ़ आने के दौरान यह पूरा इलाका भी जलमग्न हो जाएगा।
पहले भी सरकारी भूमि हो चुकी विनियमित
संस्था द्वारा सरकारी तालाब की गाटा संख्या 355 व 358, 362, 396, घोला की गाटा 354, 380, 397 व 384/1162, चकमार्ग की गाटा 364 बंजर की गाटा 359 पर अवैध कब्जा कर कुल 1.984 हेक्टेअर भूमि को अपने बाउंड्री में मिला लिया था। इस पर तात्कालिक लेखपाल की रिपोर्ट पर 29 जुलाई 2004 को संस्था पर तीन करोड़ 96 लाख 68 हजार रुपये का जुर्माना तहसीलदार इकौना की न्यायालय द्वारा लगाया गया था। इसी के बाद संस्था की मांग पर तत्कालिक सरकार ने जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 161 में संशोधन किया था। इस संशोधन के बाद 15 जून 2007 को एसडीएम इकौना ने संस्था से एक शपथ पत्र लेकर गाटा 565 , 509, 487, 478,व 535, बंजर की गाटा 564 क, चकमार्ग की गाटा 506, नवीन परती की गाटा 563, नाली कि गाटा 547, घोला की गाटा 541 कुल 1.225 हेक्टेअर भूमि का विनिमय संस्था के नाम किया जा चुका है।
इन गांवों को झेलना होगी परेशानी
प्राकृतिक जल निकास के रास्ते बंद होने के बाद कटरा, विनियमित क्षेत्र, ग्राम राजगढ़ गुलहरिया, चक्रभंडार, खरगौरा गणेश, खरगूपुर का अस्तित्व ही समाप्त हो सकता है।
सरकारी भूमि विनिमय का आवेदन संस्था ने शासन स्तर पर किया है। शासन को ही इस पर निर्णय लेना है। शासन स्तर से किए जाने वाले निर्णय के आधार पर ही इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। -आरपी चौधरी, एसडीएम इकौना