श्रावस्ती। किसान पारंपरिक ढंग से खेती किसानी छोड़ नवीन तकनीक अपनाएं। साथ ही बोआई के लिए नए बीजों का चयन करें। ताकि पैदावार में गुणात्मक सुधार हो। इससे न सिर्फ उनको अच्छी पैदावार मिलेगी बल्कि उनकी आमदनी में भी दोगुना लाभ होगा।
यह बातें ग्रामीण डेवलेपमेंट सर्विसेज की कार्यक्रम प्रबंधक मांडवी दीक्षित ने किसानों के नाम जारी अपील में कहीं। उन्होंने कहा कि कृषि से होने वाली आय में वृद्धि के लिए किसानों को चाहिए कि वह कृषि का विविधीकरण, यंत्रीकरण तथा सस्ती व सुगम सिंचाई व्यवस्था अपनाएं। खाद्य फसलों में उन्नत प्रजाति के बीजों का उपयोग करें। रासायनिक खादों का संतुलित प्रयोग करने के साथ ही पंक्ति में बोवाई के लिये सीड ड्रिल का उपयोग करें। गेहूं में जीरो टिलेज तकनीक अपनाएं। सिरसिया तथा गिलौला में महिला स्वयं सहायता समूहों की निगरानी में पांच फॉर्म मशीनरी बैंक स्थापित किये गए हैं। जिनमें लैंड लेवलर, जीरो टिलेज, पोटैटो प्लांटर, सुपर सीडर, पावर टिलर, केल्टीवेटर आदि यंत्र उपलब्ध हैं।
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा भोजन में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दलहनी फसलें अरहर, मसूर, चना और उड़द लगाएं। जायद में मूंगफली एक अतिरिक्त फसल लगाने से किसानों को फायदा मिलेगा। इसके साथ ही किसान आमदनी बढ़ाने के लिए आलू व प्याज सहित मचान विधि से सब्जियों की खेती करें। सस्ती व सुगम सिंचाई के लिये किसान सोलर पंप लगवाएं। इसके साथ ही किसान स्प्रिंकलर व ड्रिप सिंचाई का प्रयोग करें। जिससे उनकी लागत कम होगी। और मुनाफा अधिक होगा।