श्रावस्ती। बच्ची के साथ दुराचार और हत्या के मामले में न्यायालय ने एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला चौदह वर्ष पुराना है। अपर जिला सत्र न्यायाधीश (रेप एलांग विद पॉक्सो एक्ट) ने अपने फैसले में कारावास के साथ ही अर्थदंड की सजा सुनाई है।
मल्हीपुर थाना क्षेत्र के ग्राम डीलवा बरगदही के एक शख्स ने तीस मार्च, 2007 को थाने में एक शिकायती पत्र दिया था। इसमें आरोप लगाया था कि उनकी बारह वर्षीय भतीजी बाहर गई थी और गायब हो गई थी। काफी खोजबीन की, लेकिन वह नहीं मिली। इस पर थाने में लड़की की मां ने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि गांव के केनू प्रसाद, तिवारी प्रसाद आदि ने बताया कि घटना के दिन उन लोगों ने झुर्री व रामखेलावन के साथ दो-तीन अन्य लोगों को बच्ची को मेटहिया नाले की तरफ ले जाते देखा है। तीन मई, 2007 को मेटहिया नाले में मुख्तार के खेत के पास खोपड़ी व हड्डियां मिलीं। घटना के समय पहने हुए कपड़े से बच्ची की पहचान हुई। मामले में पुलिस ने पांच लोगों के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। विचारण के दौरान दो अभियुक्तों की मृत्यु भी हो गई।
दो महिला अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय ने बरी कर दिया। विचारण में न्यायालय ने पाया कि झुर्री ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया तो वह बेहोश हो गई। होश में आने पर उसने मां को घटना की जानकारी देने की बात कही। इससे क्रोधित होकर झुर्री ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। यही नहीं घटना को छिपाने के लिए अपने घर में ही गड्ढा खोदकर लाश को दफना दिया। जब झुर्री के घरवालों को इस बात का पता चला तो लाश को निकालकर नेपाल बॉर्डर पर मुख्तार के खेत के पास नाले में शव को दफना दिया। लगभग सवा महीने बाद लाश बरामद हुई। कुछ हड्डियां व घटना के समय पहने कपड़ों से पीड़िता की पहचान हुई। मामले में अपर जिला सत्र न्यायाधीश (रेप एलांग विद पॉक्सो एक्ट) परमेश्वर प्रसाद ने अभियुक्त झुर्री को सश्रम आजीवन कारावास व 85000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इस धनराशि में से पचास हजार रुपये पीड़िता की मां को देने का आदेश न्यायालय ने दिया है। इस संबंध में अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सत्येंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि मामला काफी गंभीर था इसलिए अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड की मांग की थी। न्यायालय ने आजीवन कारावास के साथ अर्थदंड लगाया है।