श्रावस्ती। फाइलेरिया जैसी बीमारी के खात्मे के लिए जिले के पांच गांवों का चयन किया गया है। जहां फाइलेरिया के मरीजों का चिह्नित किया जा रहा है। इन गांवों में संभावित मरीजों की स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जांच की गई। जांच में इन पांच में से तीन गांवों में फाइलेरिया के मरीज मिले हैं। जिसके बाद इन सभी पांचों गांवों में विशेष फाइलेरिया उन्मूलन अभियान की शुरुआत की गई है। इसका शुभारंभ सीएमओ द्वारा ग्रामीणों को दवा खिलाकर किया गया है।
एसीएमओ और कार्यक्रम में नोडल डॉ. मुकेश मातनहेलिया ने बताया कि अभियान के दौरान इन पांचों गांवों के करीब 7642 लोगों को फाइलेरिया की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान ग्रामीणों को फाइलेरिया से बचाव के लिए 7642 एलबेंडाजोल और 10107 आइवरमेक्टिन गोलियां खिलाने का काम किया जा रहा है। यह दवा दो साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और गंभीर रूप से बीमार लोगों को नहीं खिलाई जा रही है। यह गोलियां हमेशा चबा कर खाएं और खाली पेट कभी भी नहीं खाएं।
इसके अलावा फाइलेरिया से बचाव के लिए घर में और घर के आसपास पानी न एकत्र होने दे, क्योंकि ठहरे हुए पानी में ही मच्छर पनपते हैं। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। इस विशेष अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्राम प्रधान के सहयोग से पूरे गांव में सफाई कराया जा रहा है। झाड़ियों को भी साफ कराया जा रहा है। जिन गड्ढों में पानी भरा है, उन्हें बंद कराया जा रहा है। मच्छरों और उनके लार्वा को नष्ट करने के लिए फॉगिंग कराई जा रही है। साथ ही ग्रामीणों को फाइलेरिया के प्रति जागरूक करने और दवा को लेकर उनकी शंकाओं के समाधान के लिए गांवों में सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च संस्था द्वारा नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया जा रहा है।
इन गांवों में चल रहा अभियान
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि यह विशेष अभियान सिरसिया के पिपरहवा, ललपुर अयोध्या, इकौना के पांडेपुरवा, कसजदरा और जमुनहा के बहोरवा गांव में चलाया जा रहा है। जहां आशा कार्यकर्ता द्वारा प्रतिदिन गांव के 25 घरों का सर्वे कर शत-प्रतिशत पात्र लोगों को दवा खिलाने का काम किया जा रहा है।
फाइलेरिया के लक्षण व उपाय
फाइलेरिया संक्रमित मच्छरों के काटने के बाद व्यक्ति को बहुत सामान्य लक्षण दिखते हैं। जैसे कि अचानक बुखार आना (आमतौर पर बुखार 2-3 दिन में ठीक हो जाता है), हाथ-पैरों में खुजली होना, एलर्जी और त्वचा की समस्या, स्नोफीलिया, हाथों में सूजन, पैरों में सूजन के कारण पैर का बहुत मोटा हो जाना, अंडकोष में सूजन आदि। फाइलेरिया का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। फाइलेरिया से ग्रसित मरीजों का स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुफ्त इलाज किया जाता है। उपचार की सुविधा जिले की सभी पीएचसी व सीएचसी पर भी उपलब्ध है। फाइलेरिया लाइलाज बीमारी जरूर है, लेकिन उपचार से इसको बढ़ने और फैलने से रोका जा सकता है।