शामली। ओवरलोडिंग, यातायात नियमों के उल्लंघन और ऑनलाइन चालान से बचने के लिए कुछ ट्रक चालक और ट्रांसपोर्टर फर्जीवाड़े का ऐसा खेल खेल रहे हैं, जिसने परिवहन विभाग और पुलिस भी हैरान है।
जांच में सामने आया है कि दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से दूसरे ट्रकों के नंबरों का इस्तेमाल कर वाहन सड़कों पर दौड़ाए जा रहे हैं। चालान होने पर उसका संदेश असली वाहन स्वामी के पास पहुंचता है, जबकि नियम तोड़ने वाला चालक आसानी से बच निकलता है। पिछले तीन माह में परिवहन विभाग के पास ऐसे करीब 30 मामले पहुंचे हैं। मामलों की जांच में फर्जी नंबर प्लेट का खेल उजागर हुआ है। अब विभाग ने ऐसे छह ट्रांसपोर्टरों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें पुलिस से भी सहयोग मांगा गया है। संवाद
ऐसे सामने आया फर्जीवाड़े का नेटवर्क
परिवहन विभाग के अनुसार कई ट्रांसपोर्टर ऐसे ट्रकों के नंबर चालकों को उपलब्ध करा रहे हैं, जो लंबे समय से खड़े हैं या किसी दूसरे राज्य में संचालित हो रहे हैं। चालक इन नंबरों की प्लेट बनवाकर अपने वाहनों पर लगवा लेते हैं और ओवरलोडिंग या अन्य नियमों के उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई से बचने की कोशिश करते हैं।
केस : एक
चालान हुआ तो गुरुग्राम से पहुंच गया मालिक
एक जून को परिवहन विभाग ने ओवरलोडिंग के मामले में एचआर-63डी-6868 नंबर के ट्रक का चालान किया। चालान का संदेश गुरुग्राम निवासी वाहन स्वामी के मोबाइल फोन पर पहुंचा। उन्होंने विभाग से संपर्क कर बताया कि उनका ट्रक पिछले तीन माह से शामली आया ही नहीं है। मामले की जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला कि सोनीपत के एक चालक ने फर्जी तरीके से उक्त नंबर प्लेट अपने ट्रक पर लगा रखी थी।
केस -दो
पंजाब के ट्रक का नंबर, दौड़ रहा था दूसरा वाहन
29 मई को बिडौली क्षेत्र में लगे ऑनलाइन कैमरों की मदद से पीबी-10जी-1486 नंबर के ट्रक का ओवरलोडिंग में चालान किया गया। चालान का संदेश लुधियाना निवासी वाहन स्वामी के पास पहुंचा। उन्होंने बताया कि उनका ट्रक उस दिन शामली क्षेत्र में आया ही नहीं। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि देहरादून के एक चालक ने अपने ट्रक पर उक्त नंबर प्लेट लगाई हुई थी। उसने यह नंबर दूसरे ट्रक चालक और ट्रांसपोर्टर के माध्यम से हासिल किया था ताकि ऑनलाइन चालान से बच सके।
केस-तीन
नंबर प्लेट ही कर दी अधूरी
12 जून को परिवहन विभाग ने एक ट्रक को पकड़ा, जिस पर केवल आंशिक नंबर लिखा हुआ था। पूछताछ में चालक ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन कैमरों की पकड़ से बचने के लिए उसने जानबूझकर अधूरी नंबर प्लेट लगाई है। चालक ने यह भी बताया कि उसके साथ 30 से अधिक अन्य चालक भी इसी तरह के तरीके अपना रहे हैं।
राजस्व का होता है नुकसान
अधिकारियों का कहना है कि फर्जीवाड़े से विभाग को राजस्व का नुकसान होता है। कई बार मालिक तक मैसेज नहीं पहुंचने के कारण चालान नहीं भरा जाता। जांच में सामने आया है कि जो ट्रांसपोर्टर चिह्नित किए हैं, उनमें कुछ के खुद के ट्रक हैं तो कुछ दोस्तों को इस तरह से नंबर उपलब्ध करा रहे हैं।
छह ट्रांसपोर्टर रडार पर
एआरटीओ प्रवेश कुमार ने बताया कि जांच में दिल्ली, हरियाणा के गुरुग्राम, सोनीपत, मेरठ, बागपत, शामली, देहरादून, हरिद्वार अन्य क्षेत्रों के कुछ ट्रांसपोर्टरों की भूमिका सामने आई है। ये ट्रांसपोर्टर चालकों को दूसरे वाहनों के नंबर उपलब्ध करा रहे हैं। ऐसे छह ट्रांसपोर्टरों को चिह्नित किया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फर्जी नंबर प्लेट लगाने वालों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।