कैराना में दुकान पर बैठकर बातचीत करते दोनों वर्गों के लोग।
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कैराना। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले हर कोई सहमा था कि क्या होगा। मगर कर्ण की बसायी कैराना नगरी के लोगों ने भाईचारे का ऐसा संदेश दिया कि कस्बे को लेकर बनी गलत धारणा भी धराशाई हो गई। फैसला के बाद रविवार को भी कस्बे के बाजारों में दोनों वर्गों के लोग आपस में बैठे हंसी खुशी माहौल में बतिया रहे थे।
कस्बे के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि कर्ण की बसायी नगरी कैराना एक ऐसा कस्बा है जहां आज तक सांप्रदायिक फसाद नहीं हुआ। यहां 75 फीसदी आबादी मुस्लिम है, लेकिन इसके बाद भी यहां आपसी भाईचारा और प्रेमभाव है। रविवार को भी बाजारों में दोनो वर्गों के लोगों के बीच आपसी प्यार और सौहार्द देखने को मिला। शामली बस स्टैैंड के पास जनरल मरचेंट की दुकान करने वाले अनिल गुप्ता की दुकान पर पड़ोस में ही बरतन की दुकान करने वाले अयूब मंसूरी बैठे बतिया रहे थे। मिठाई की दुकान करने वाले जयचंद भी यहां आकर चर्चा में शामिल हो गए। इसके अलावा दुकान पर फरहान, अकरम और दीपक गुप्ता भी बैठ कर हंसी ठहाके कर रहे थे। पूछने पर अय्यूब ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सही फैसला करके पुराना विवाद खत्म कर दिया है।
जयचंद ने कहा कि यहां सब हमारे भाई है। हमें मंदिर मस्जिद के मामले में नही पड़ना। फरहान ने कहा कि कैराना में आज तक कोई झगड़ा नहीं हुआ। यहा की जनता अमन पसंद है। वहीं किताबों की दुकान करने वाले गौरव गुप्ता के पास सामने ही चाय की दुकान करने वाला इरशाद बैठा था। उन्होंने कहा कि उनके पिता दुकान पर आ गए तो सोचा कि कुछ देर पड़ोसी के पास ही बैठ जाऊं। हम दोनों पुराने दोस्त हैं। इसके अलावा कस्बे में बाजारों में भी मुस्लिम ग्राहक दूसरे वर्ग की दुकानों पर खरीदारी करते नजर आए। उनका कहना था कि कस्बे में दोनों वर्ग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर धूमधाम से मनाते हैं।