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रामलीला देखने से होती है सुख की अनुभूति

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गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव हथछोया में रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : SHAMLI
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रामलीला देखने से होती है सुख की अनुभूति
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शामली, कैराना। करीब 30 साल पहले रामलीला मंचन के दौरान गोशाला भवन खचाखच भरा रहता था। रामलीला रात आठ बजे शुरू होकर रात्रि दो बजे संपन्न होती थी। उस समय रामलीला देखने के लिए परिवार के लोग व महिलाएं जमीन पर चादर बिछा कर बैठते। बच्चे रामलीला शुरू होने से पहले ही अपनी चादर बिछा देते थे। अब गोशाला भवन में बैठने के लिए चादर का स्थान कुर्सियों ने ले लिया है। मोबाइल, इंटरनेट व टीवी पर रामायण के कारण पहले से कम लोग ही रामलीला देखने जाते हैं। लेकिन बुजुर्गों को अब भी रामलीला देखने पर सुख की अनुभूति होती है।
मोहल्ला गुंबद निवासी 60 वर्षीय सुंदर लाल जिंदल ने बताया कि जब वह 20 साल के थे। तब भी हर रोज रामलीला देखने परिवार के साथ जाते थे और अब भी जाते हैं। 70 वर्षीय घनश्याम गोयल ने बताया कि 1970 से 2018 तक उन्होंने रामलीला में दशरथ, सीता, माता, लक्ष्मण व विश्वामित्र के पाठ भी किए। आज उम्र अधिक हो गई, लेकिन रामलीला देखने जरूर जाते हैं। मोहल्ला गुंबद निवासी 65 वर्षीय विनोद गर्ग ने बताया कि पहले रामलीला में भीड़ अधिक होती थी। रामलीला देखने से सुख की अनुभूति होती है।
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जोड़िया कुआं पर परचून की दुकान करने वाले 55 वर्षीय रामौतार मित्तल ने रामलीला में कामदेव, लक्ष्मण, राम व दशरथ के पाठ भी किए। आज भी रात में रामलीला देखने चले जाते हैं। यहीं रहने वाले 56 वर्षीय संदीप मित्तल ने बताया कि पहले परिवार की महिलाएं भी रामलीला देखने जाती थीं, लेकिन आज महिलाएं कम जाती हैं। रामलीला देखना अच्छा लगता है।
धूमधाम से निकाली गई राम बारात
बाबरी। गांव में मंगलवार को राम बारात धूमधाम से निकाली गई। मंगलवार को बाबरी रामलीला कमेटी ने झंडा चौक से राम बारात का शुभारंभ किया गया। जो बैंड बाजे के साथ मुख्य बाजार, भारत माता चौक, हरिजन बस्ती, वाल्मीकि बस्ती, पाल चौक, कैड़ी बस स्टैंड, कुरैशी बस्ती होते हुए रामलीला मैदान में समापन हुआ। इस दौरान शोभायात्रा में शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण आदि झांकियां शामिल रहीं। राम बारात का गांव में जगह-जगह महिलाओं ने पुष्प वर्षा कर व मिठाई खिलाकर व तिलक लगाकर स्वागत किया। हिमांशु कश्यप, मिलन कुमार, अंकित कश्यप, निकुंज क्रमश: राम, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघभन की भूमिका में रहे। इस दौरान सुधीर आर्य, गोल्डी चौधरी, भूरा टांक, आकाश शर्मा, विकास कश्यप आदि मौजूद रहे।
सच्चे मन से राम के आदर्श अपनाएं
कांधला। श्रीरामलीला कमेटी पंजाबी धर्मशाला के तत्वावधान में चल रही रामलीला में मुख्य अतिथि थाना प्रभारी निरीक्षक रोजंत त्यागी रहे। श्रीरामलीला कमेटी ने उन्हें प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अगर हम सभी रामायण का अपने हृदय में सच्चे मन से धारणकर ले तो भाई-भाई में बंटवारे को लेकर भी कोई विवाद नहीं हो सकता। पति और पत्नी एक दूसरे का सम्मान करते रहें। पिता पुत्र में सेवा भाव और सम्मान की मर्यादाएं स्थापित होंगी। कलाकारों ने ताड़का वध प्रसंग का मंचन किया। कार्यक्रम का संचालन ललित शर्मा ने किया। इस दौरान शिवकांत, रंजन शर्मा, प्रशांत, प्रदीप कुमार सिंघल, बंटी, महावीर प्रसाद अग्रवाल, अनिल मित्तल सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे। वहीं, श्रीरामलीला कमेटी मंडप पंचवटी के तत्वावधान में गणेश वंदना और रामचंद्र जी आरती से श्रीरामलीला का शुभारंभ किया गया। जिसमें रावण-वेदवती संवाद का मंचन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान जोनी शर्मा, अशोक महेश्वरी, श्याम कुमार सिंघल, मेहरचंद आदि मौजूद रहे।
ताड़का वध, राम-लक्ष्मण ने विश्वामित्र से ली शिक्षा
कैराना। गोशाला भवन में चल रही श्री रामलीला महोत्सव के छठे दिन ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने सुंदर अभिनय कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बारिश आने के कारण लीला को बीच में ही विश्राम देना पड़ा। राम का अभिनय सतीश प्रजापति, लक्ष्मण का अभिनय राकेश प्रजापति, विश्वामित्र का अभिनय आशु गर्ग, ताड़का का अभिनय अरविंद मित्तल, वरुण कौशिक और आदित्य तथा मारीच और सुबाहु का अभिनय ऋषि पाल शेर और सोनू कश्यप ने किया।
श्रवण कुमार के नाटक का मंचन
गढ़ीपुख्ता। कस्बे में श्री राम भवन में चल रही रामलीला में श्रवण कुमार के नाटक का मंचन किया गया। दशरथ का अभिनय धन प्रकाश गिरी, श्रवण कुमार का अभिनय देवी सिंह, शांतनु का अभिनय ऋषि पाल चौधरी ने किया। इस अवसर पर नरेश कुमार सैनी, रामलीला कमेटी अध्यक्ष नीरज जैन, सुख माल सिंह, राजवीर सिंह, चरण सिंह, मेनपाल, रामपाल सिंह, राजेंद्र शर्मा, नरेश गोस्वामी, श्रीनिवास बागड़ी आदि मौजूद रहे। वहीं, ऊन तहसील के गांव हथछौया में रामलीला का उद्घाटन ग्राम प्रधान देवेंद्र तोमर ने फीता काटकर किया। हवन-पूजन के बाद प्रथम दिन नारद मोह की लीला का मनमोहक मंचन किया गया। रावण वेदवती संवाद प्रस्तुत किया गया। इस दौरान बालेंद्र तोमर, बंटी तोमर, लाला सुरेंद्र, रणवीर तोमर, कुलदीप तोमर, अनिल तोमर, महावीर सिंह, अरुण तोमर, सोम तोमर आदि मौजूद रहे।
श्रवण मरण की लीला देख नम हुईं आंखें
हसनपुर लुहारी। गांव हसनपुर लुहारी में श्री रामलीला में तीसरे दिन कलाकारों ने रावण वेदवती संवाद और श्रवण कुमार के नाटक का भव्य मंचन किया। जिसमें रामलीला कमेटी डायरेक्टर मनोज रूहेला ने भगवान विष्णु की आरती कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि रामलीला के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि हमें समाज में कैसा व्यवहार करना चाहिए। रामलीला के मंच पर अनुज सैनी ने वेदवती, नाथीराम ने रावण, सन्नी ने श्रवण कुमार, धर्मपाल ने दशरथ, रामपाल ने श्रवण की माता और नाथीराम सैनी ने श्रवण के पिता का अभिनय किया।
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श्री राम ने किया ताड़का का वध
जलालाबाद। पंचायती रामलीला कृष्ण लीला समिति के गांधी चौक रंगमंच पर गुरु वशिष्ठ ने रामलीला में अयोध्या के राज दरबार में पहुंचकर दशरथ के चारों पुत्रों नामकरण किया। चारों पुत्रों को गुरु आश्रम में शिक्षा के लिए ले गए। शिक्षा प्राप्त कर अयोध्या आए। गुरु विश्वामित्र के आश्रम में राक्षसों यज्ञ का खंडित किया तो विश्वामित्र ने महाराज दशरथ से यज्ञ रक्षा हेतु राम लक्ष्मण को मांगा। राम ने ताड़का का वध कर गुरु के यज्ञ की रक्षा की। हिमांशु जुनेजा ने राम, गौरव कोरी ने लक्ष्मण, बृजमोहन ने दशरथ, हरीश जुनेजा ने विश्वामित्र, राधेश्याम शर्मा ने गुरु वशिष्ठ, योगी शेखर ने ताड़का का किरदार निभाया। कथावाचक पंडित प्रणव शास्त्री, देवराज जुनेजा राजकुमार रोहिला आदि ने अपने अभिनय से दर्शकों की तालियां बटोरी।

गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के गांव हथछोया में रामलीला का मंचन देखते बच्चे व ग्रामीण- फोटो : SHAMLI

कांधला में रामलीला का मंचन करते कलाकार- फोटो : SHAMLI

कैराना में रामलीला का मंचन करते कलाकार- फोटो : SHAMLI

जलालाबाद में रामलीला का मंचन करते कलाकार- फोटो : SHAMLI

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