आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति समाज के लिए चिंताजनक
शामली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग मानसिक तनाव में रहते हैं। तनाव की वजह से आत्महत्या करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। कोई पारिवारिक विवाद को लेकर तनाव में है तो कोई कारोबार को लेकर है। ऐसे हालात में लोग अपनी जिंदगी को दांव पर लगा रहे हैं। जनपद में भी पूर्व में आत्महत्या करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी है। मनोचिकित्सक का कहना है कि आत्महत्या की बढ़ रही प्रवृत्ति समाज के लिए चिंताजनक है।
हाल ही में आसपास के जिलों में आत्महत्या करने की कई घटनाएं सामने आई है। दो दिन पहले बिजनौर जिले में महिला अपने बच्चों को नहर में फेंकने के बाद खुद भी पानी में कूदने की घटना हुई है। आत्महत्या करने की बढ़ रही प्रवृत्ति समाज में चिंता का विषय बन रही है। शामली जनपद की बात करें तो यहां पर भी पूर्व में कई घटनाएं इस तरह की हो चुकी है। इसी साल जनवरी माह में रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात सिपाही का शव पेड़ पर नायलोन की रस्सी के सहारे लटका मिला था। पुलिस ने सिपाही द्वारा आत्महत्या करना बताया था। यह सिपाही मेरठ जनपद के थाना जानी क्षेत्र का निवासी थी।
दो अप्रैल को कोरोना के शक में निर्माणाधीन जिला संयुक्त चिकित्सालय में बनाए गए क्वारंटीन वार्ड में भर्ती कांधला क्षेत्र निवासी युवक ने गमछे से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली थी। युवक दिल्ली में काम करता था। कोरोना काल में काम धंधा बंद होने पर वह गांव में आया था। सांस लेने में परेशानी की शिकायत पर उसे क्वारंटीन वार्ड में रखा था। इसी महीने 14 अगस्त को आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव जलालपुर के जंगल में पेड़ पर गांव गोमतीपुर निवासी ग्रामीण का शव पेड़ पर लटका मिला था। पुलिस की जांच में यह मामला भी मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या का होना पाया गया था। पिछले सालों में भी जिले में आत्महत्या की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें अधिकतर मामलों में पारिवारिक विवाद या समस्याएं होना सामने आया है।
कोट
कोरोना काल में बिजनेस प्रभावित होने, बेरोजगारी बढ़ने आदि को लेकर तनाव बढ़ रहा है। इसके अलावा घरेलू समस्याओं को लेकर भी लोग तनाव में रहते हैं। इन सबके चलते कुछ लोग गलत कदम उठा लेते हैं और आत्महत्या तक कर लेते हैं। यह स्थिति समाज के लिए चिंताजनक है। इससे बचने के लिए लोगों को अपने मन में नकारात्मक विचारों को नहीं आने देना चाहिए। सकारात्मक प्रेरणादायक विषयों को पढ़े व देखें, उनसे जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी।
- डा. अरुण राय, मनोचिकित्सक।