सर्दी, जुुकाम, खांसी, गला खराब और वायरल पीड़ित 20 फीसदी मरीजों की तादाद बढ़ी
सावधानी बरतें, लापरवाही कर देगी बीमार
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। बीते कई दिन से गर्मी और उमस लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। इससे नजला, जुकाम, खांसी, गला खराब और वायरल के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल में 20 फीसदी से ज्यादा मरीज बढ़ गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि उमस भरी गर्मी में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
बीते कई दिन से गर्मी के साथ उमस के चलते लोग पसीना-पसीना हो रहे हैं। पसीने से तर-बतर लोग खानपान में जरा सी लापरवाही करते ही बीमार हो रहे हैं। इसके चलते अस्पताल में लगभग 20 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। सीएचसी शामली में बुधवार को लगभग 550 नए मरीज और इतने ही पुराने पर्चे के मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इस तरह से मरीजों की संख्या एक हजार के पार हो गई। इससे पहले अस्पताल में मरीजों की संख्या 800 के आसपास पहुंच रही थी।
सीएचसी की फिजिशियन डॉ. आफरीन ने बताया कि गर्मी और उमस बढ़ने से समर कोल्ड यानि नजला, जुकाम खांसी और वायरल बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। करीब 50 से 60 फीसदी मरीज इन्हीं रोगों से संबंधित आ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि मौसम में उमस से शरीर पर पसीना आता है। इसमें ठंडा पानी या बर्फ का सेवन करने से बचना चाहिए। ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करने से गला खराब होने, नजला, जुकाम, खांसी होने के साथ वायरल बुखार होने की आशंका रहती है। इसमें छींक आना, नाक बंद होना, या नाक बहना गले में खराश होना आदि लक्षण होते है। इसलिए स्वस्थ रहने के लिए खान-पान में सावधानी बरतनी चाहिए।
वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. उपकार मलिक ने बताया कि मौसम का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। बच्चों में वायरल बुखार के साथ नजला, जुकाम व खांसी के केस ज्यादा आ रहे हैं। सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. रामनिवास ने बताया कि बीते कई दिन से अस्पताल में मरीज बढ़े हैं। इनमें ज्यादातर गर्मी और उमस की वजह से नजला, जुकाम, खांसी पीड़ित ज्यादा हैं। अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है।
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समर कोल्ड के लक्षण
बार-बार छींक आना।
नाक बहना या बंद होना।
खांसी होना।
गले में खराश होना।
गले व सीने में जकड़न होना।
बचाव-
पानी ज्यादा पीए।
तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें।
बर्फ व ठंडी चीजों का सेवन न करें।
बाहर धूप से आने के कुछ देर बाद पानी पीये।
धूप से बचने के लिए सिर पर कपड़ा या कैप रखें।
मौसमी फलों का सेवन करें।
हल्का व सुपाच्य भोजन लें।
चिकित्सक की सलाह से दवा लें।