शामली। सुपोषण के लिए हर साल कार्यक्रम चलाएं जाते हैं और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपचार दिया जाता है। इसकेे बाद भी जिले में कुपोषण दूर नहीं हो रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल लगभग आधे बच्चे कुपोषित मिले हैं।
शासन के निर्देश पर हर साल सितंबर माह को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जाता है। इस बार भी एक सितंबर से राष्ट्रीय पोषण माह शुरू हुआ है। इसके तहत कुपोषण दूर करने के लिए पिछले सालों की तरह इस बार भी विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी उपचार दिया जाता है। इसके बाद भी हर साल कुपोषित बच्चे मिल रहे हैं। हालांकि विभागीय आंकड़ों में पिछले साल की तुलना में इस साल कुपोषित बच्चों की संख्या आधी रह गई है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुपोषण को दूर करने और बच्चों के सुपोषण के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाएं जा रहे हैं। पिछले साल सितंबर 2020 में 3557 कुपोषित और 924 अतिकुपोषित बच्चे चिह्नित किए गए थे, जबकि इस साल अब तक 551 अतिकुपोषित और 1614 कुपोषित बच्चे चिह्नित हुए हैं। कुपोषित बच्चों के सुपोषण करने के लिए बाल पुष्टाहार उपलब्ध कराने के साथ ही उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।