शामली। जिले में बासमती धान की रोपाई के लिए किसान खेतों में पौध तैयार करने में जुटा है। हालांकि पूसा बासमती-1, पूसा बासमती-1121, हरियाणा बासमती-1, उन्नत पूसा बासमती-1, पूसा बासमती-6, पूसा बासमती-1509, पूसा बासमती-1637, पूसा बासमती-1728 एवं पूसा बासमती-1718 की उपज अपेक्षाकृत अधिक है। किसान बीज का चयन करके अपनी धान की पैदावार बढ़ा सकते हैं।
बासमती धान की प्रजातियों की जल्दी रोपाई करने पर वानस्पतिक वृद्धि अधिक हो जाती है। देर से रोपाई करने पर पर्याप्त वृद्धि नहीं हो पाती है। दोनों ही दशाओं में उपज में कमी आ जाती है। बौनी प्रजतियों को जून के आखिरी सप्ताह से मध्य जुलाई तक रोप देना चाहिए। पूसा बासमती 1509 को 15 जुलाई के बाद खेत में रोपना चाहिए। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर एसपी सिंह के मुताबिक पौध में 5-6 पत्तियां बीजाई के 20-25 दिन में बन जाती है, समझिए कि पौध रोपाई के लिए तैयार है। पूसा बासमती 1509 की पौध 18-20 दिन होने पर रोप देनी चाहिए। पौध उखाड़ने से पहले नर्सरी में पानी लगाना चाहिए। इससे पौध उखाड़ने में आसानी रहेगी। बकाने रोग के नियंत्रण में भी पानी भरकर पौध उखाड़ना प्रभावकारी है। अच्छी तरह से तैयार व समतल खेत में 20-20 सेंटीमीटर की दूरी पर दो-तीन पौधों को एक स्थान पर रोपना चाहिए। 10 लाईन लगाने के बाद एक लाइन चलने-फिरने के लिए छोड़ देनी चाहिए।
बीज की मात्रा एवं बीज शोधन
किसानों को सदैव आधारीय/प्रमाणित बीज ही प्रयोग करना चाहिए। 6.0 किग्रा बीज की मात्रा एक एकड़ के लिए पर्याप्त होती है। प्रमाणित बीज को एक बार साफ पानी में निकालकर 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर कर रखना चाहिए। इसी समय बीज उपचार हेतु रसायन को भी पानी में डाल देना चाहिए। बीज उपचार हेतु टृआई कोडरमा हरजेनियम की 5.0 ग्राम मात्रा अथवा पारा युक्त फफूंदी नाशक कार्बेन्डाजिम की 2.0 ग्राम मात्रा एक किग्रा बीज उपचार के लिए पर्याप्त होती है। 24 घंटे बाद पानी निकाल कर इस बीज को एक बोरे में भरकर ऊपर से 4-5 बोरे डालकर 24-36 घंटे के लिए छांव में रखना चाहिए। इस प्रकार बीज पूर्ण रूप से अंकुरित हो जाएगा।
कैैैसे करे पौध तैयार
बासमती धान में न्यूनतम 25 वर्गमीटर प्रति किग्रा बीज की दर से पौधशाला क्षेत्र की आवश्यकता होती है। कर्मचारी बनाने से पूर्व एक एकड़ (6 बीघे) की रोपाई हेतु पौधशाला में 100-150 किग्रा सड़ी हुई गोबर की खाद मिला देनी चाहिए। नर्सरी के लिए सिंचाई व जलनिकास की उचित व्यवस्था वाले खेत में 3-4 जुताई करके मिट्टी को ढेले रहित बनाकर 1.5-2.0 मीटर चौड़ी क्यारियां बना लेनी चाहिए। इनमें 3-4 सेंटीमीटर पानी भर लें। एक एकड़ की नर्सरी में 2.0 किग्रा यूरिया, 1.5 किग्रा डीएपी,1.5 किग्रा म्यूरेट आफ पोटाश एवं 1.0 किग्रा जिंक डालना चाहिए। अंकुरित बीज को समान रूप से शाम के समय क्यारियों में बिखेर देना चाहिए। पौधशाला की सिंचाई सदैव शाम के समय करनी चाहिए। बिजाई के बाद 5-6 दिन तक क्यारी को गीला रखना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ाकर 3-4 सेंटीमीटर कर देना चाहिए।
खेत की तैयारी
खेत में धान से पूर्व हरी खाद के लिए मूंग, ढैचा अथवा सनई की फसल लेनी चाहिए। रोपाई से 1-4 दिन पूर्व हरी खाद को खेत में पलट कर अच्छी तरह मिला देना चाहिए। खेत में पानी भरकर दो-तीन बार पडलिंग करके पापा लगाकर खेत को समतल बना लेना चाहिए। रोटावेटर उपलब्ध होने पर हरी खाद को सीधे पानी भरकर खेत में पलट सकते हैं। इसमें एक साथ पलटाई एवं पडलिंग हो जाएगी।
उर्वरक एवं खाद
बौनी प्रजतियों के लिए यूरिया 140 किग्रा, डीएपी 90 किग्रा, म्यूरेट आफ पोटाश 70 किग्रा एवं जिंक सल्फेट 25 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होती है। डीएपी, पोटाश एवं जिंक की पूरी मात्रा अंतिम पडलिंग के समय प्रयोग करनी चाहिए। यूरिया की आधी मात्रा रोपाई के 10-15 दिन बाद एवं शेष मात्रा को दो बार में आवश्यकता अनुसार प्रयोग करें।