संवाद न्यूज एजेंसी शामली /कैराना/ गढ़ीपुख्ता/ ऊन/ जलालाबाद। फार्मर रजिस्ट्री के लिए कृषि विभाग अभियान चलाकर किसानों को जागरूक कर रहा है लेकिन पांच माह में जिले में सिर्फ 50 प्रतिशत किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो सकी है। इसकी वजह पंजीकरण के दौरान आने वाली तकनीकी दिक्कत है। आधार कार्ड और बैंक खाते में नाम मिस मैच होने के अलावा ओटीपी न आने की समस्या बनी है। कभी तो रात एक बजे ओटीपी आता है ऐसे में किसान परेशान हैं कि वह किस तरह अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। लक्ष्य पूरा न होता देख अब रजिस्ट्रेशन होगा। लक्ष्य पूरा करने के लिए कृषि विभाग ने अंतिम तारीख 30 अप्रैल की है।
उत्तर प्रदेश में एग्री स्टैक योजना के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 18 नवंबर 2024 को हुई थी। इस अभियान का उद्देश्य किसानों का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है, जिससे उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं व सब्सिडी का लाभ सीधे, पारदर्शी और प्रभावी रूप से मिल सके।
अभियान को प्रारंभिक रूप से 31 दिसंबर तक चलाया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2025 कर दिया गया। इसके बाद भी यह प्रक्रिया जारी है, ताकि छूटे हुए किसानों को शामिल किया जा सके। अब फार्मर रजिस्ट्री की तारीख को बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है। जिले में 101707 किसानों की रजिस्ट्री होनी है। कृषि विभाग के अनुसार, अभी तक सिर्फ 50 प्रतिशत यानी किसानों ने ही रजिस्ट्री कराई है। जबकि करीब 50 प्रतिशत किसानों की रजिस्ट्री बाकी है। अब 30 अप्रैल रजिस्ट्री कराने की अंतिम तारीख घोषित की है। सवाल यह उठता है कि क्या 9 दिन में 59 प्रतिशत किसानों की रजिस्ट्री हो पाएगी। हालांकि, विभागीय अधिकारी जल्द रजिस्ट्री पूरी होने की बात कह रहे हैं।
n यह बोले सीएससी संचालक : सीएससी संचालकों संजीव (चौसाना), विकास कश्यप उद्पुर, धर्मेंद्र बिडौली, अब्दुल रहमान बल्लामजरा और विकास खेड़की ने बताया कि अधूरी रजिस्ट्रियों की सूची में कई ऐसे नाम हैं जो या तो मृतक हैं, या जिनके आधार कार्ड और खतौनी में नाम मेल नहीं खाते। साथ ही कई किसान भ्रमित हैं कि उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री पहले ही करवा ली थी, इसलिए बार-बार बुलाया जा रहा है।