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Shamli News: 62 गांवों में छह साल में नहीं जली एक भी पराली

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शामली। भले ही जिले के विभिन्न गांवों में पराली जलाने के मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हो लेकिन जिले के 62 गांव ऐसे भी हैं, जिनमें किसान धान से लेकर गन्ने की सबसे अधिक खेती करते हैं मगर पिछले छह साल में पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। कृषि विभाग इन गांव के किसानों को रॉल मॉडल के तौर पर जागरूकता अभियान में भी शामिल किया जाएगा। शामली जिले की यदि बात की जाए तो यहां पर 80 हजार हेक्टेयर में किसान गन्ने जबकि 22 हजार हेक्टेयर में धान की खेती करते हैं। सैटेलाइट से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अब तक जिले में 34 स्थानों पर बर्निंग की घटनाएं हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने मॉडल के तौर पर जिले के 62 ऐसे गांव चिन्हित किए हैं, जिनमें पिछले छह साल से पराली जलाने की कोई भी घटनाएं सामने नहीं आई हैं। चिन्हित गांवों के ग्रामीणों के तरीकों से जिन गांवों में पराली जलाने की अधिक घटनाएं हो रही है, उन्हें जागरूक कराया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि डी कंपोजर से प्रबंधन के अलावा पराली को गोशालाओं में दिया जा सकता है इसके अलावा पराली को शामली की ही फैक्टि्रयों में बेचा जाता है सकता है जहां पर पराली से किट्टी भी बनाई जाती है।
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कृषि उपनिदेशक प्रमोद कुमार और जिला कृषि अधिकारी प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि पराली प्रबंधन की दिशा में काम करने वाले ग्रामीणों की वीडियो बनवाकर विभिन्न गांवों के ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। सराहनीय कार्य करने वाले किसानों को भी जल्द ही सम्मानित किया जाएगा।सोंटा गांव के प्रधान असलम का कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारियों के जागरूकता अभियान के कारण ग्रामीण जागरूक है।
चिन्हित किए गांव जिनमें छह साल में पराली जलाने का कोई मामला नहीं ऊन ब्लॉक का गंगा रामपुर डोकपुरा, ढिंडाली , नाई नंगला, पटनी परतापुर, नौईनांगली, पुरमाफी, पेलखा, बजेडी, बीबीपुर, राझड, रंगानाख, सांपला,कैराना के मवी अहतमाम, अकबरपुर सुनहेटी, इस्सोपुर खुरगान, ऊंचागांव, एरटी, कंडेला कसेरवा कलां, खेड़ी कुच्चा, गंदराऊ, गोगवान
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कांधला के असदपुर, आल्दी, कांधला देहात, किवाना, खंद्रावली, गंगरु, गुर्जरपुर, चढ़ाव, जसाला, डांगरौल, सुन्ना, मतनावली, मीमला, सल्फा्र भारसी, भनेड़ा आदि हैं।
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