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पार्किंग शुल्क को लेकर हरियाणा- यूपी रोडवेज के अफसर आमने- सामने

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शामली रोडवेज बस अड्डे पर एआरएम से वार्ता करते हरियाणा रोडवेज परिवहन के अधिकारी। - फोटो : SHAMLI
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पार्किंग शुल्क को लेकर हरियाणा-यूपी रोडवेज आमने-सामने
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शामली। पार्किंग शुल्क 250 रुपये प्रति बस वसूलने के विवाद को लेकर यूपी और हरियाणा रोडवेज के अफसर आमने-सामने आ गए हैं। हरियाणा रोडवेज के अफसर पार्किंग शुल्क देने से इन्कार कर रहे हैं। जबकि यूपी रोडवेज के अफसरों पार्किंग शुल्क लेने पर अड़े हैं।
बुधवार को पानीपत डिपो के यातायात निरीक्षक के साथ रोडवेज कर्मियों ने शामली पहुंचकर एआरएम आयुष भटनागर से मिले और पार्किंग शुल्क वसूलने पर एतराज जाहिर किया। पानीपत डिपो की 44 रोडवेज बसों से 250 रुपये प्रति चक्कर पार्किंग शुल्क के रूप में यूपी रोडवेज वसूल करता है। इस पर हरियाणा रोडवेज के अधिकारियों कहना है कि वह शामली रोडवेज बस स्टेशन में शामली नगर पालिका परिषद के किराएदार रहे हैं। दिसंबर 2012 में शामली रोडवेज डिपो बनने के बाद उनका टिकट काउंटर बंद कर दिया। हरियाणा रोडवेज की बसों से 250 रुपये प्रति बस पार्किंग शुल्क वसूलना शुरु कर दिया। किराएदारी में पार्किंग शुल्क वसूलना गलत है।
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एआरएम आयुष भटनागर ने कहा कि पार्किंग शुल्क वसूली रोकना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वह इस संबंध में सहारनपुर परिक्षेत्र के आरएम अनिल कुमार से मिलकर बात कर लें। शामली बस अड्डे के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी राजेंद्र चौहान का कहना है कि हरियाणा के जिलों में बस अड्डे के साथ ही बाहर सड़क पर भी यूपी रोडवेज की बसों से पार्किंग वसूली जाती है। शामली बस डिपो के बनने के बाद व्यवस्था के नाम पर अड्डे से टिकट काउंटर हटाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा की ज्यादातर बसें बिना परमिट के शामली जिले में आ रहीं हैं।
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पानीपत डिपो के प्रबंधक कुलदीप जांगड़ा ने बताया कि वह शामली रोडवेज बस स्टेशन में वर्ष 1973 से शामली नगर पालिका परिषद के किराएदार रहे हैं। शामली रोडवेज डिपो के बनने के बाद उनकी किराएदारी खत्म कर दी गई। रोडवेज बस स्टेशन से उनका टिकट काउंटर हटा दिया और अब पार्किंग शुल्क वसूल रहे हैं। वर्ष 2016 में कैराना न्यायालय में वाद दायर किया, जिसमें उनके पक्ष में वाद का निस्तारण हुआ। शामली डिपो की ओर से वर्ष 2018 में एडीजे के यहां वाद दायर किया गया। जिसमें शामली रोडवेज की अपील को खारिज कर दिया गया है। किराएदारी के लिए कैराना एडीजे न्यायालय में वाद दायर किया गया है, जो विचाराधीन है।
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