बुधवार दोपहर दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर खड़ा लिक्विड सीमेंट से भरा टैंकर शामली की तरफ चला तो एलम बाईपास के पास बाइक सवार मोनू (30) कैंटर की चपेट में आ गया। मोनू की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक ने भागने के प्रयास में टैंकर की गति बढ़ा दी। जिसमें कांधला बस स्टैंड के पास बुढ़ाना मार्ग तिराहे पर तेज गति के कारण कैंटर अनियंत्रित होकर हाईवे पर पलट गया और घिसटता हुए पांच दुकानों को तोड़ने के बाद डाक बंगले की दीवार को तोड़कर अंदर तक घुस गया।
सूचना मिलते ही एसपी अभिषेक, एएसपी संतोष कुमार सिंह सहित तमाम फोर्स मौके पर पहुंचा। करीब चार घंटे बाद आठ जेसीबी व चार हाइड्रा की मदद से टैंकर को सीधा किया गया। तब तक उसके नीचे दबे तीन लोगों की मौत हो चुकी थी। टैंकर के नीचे मरने वालों में कांधला के मोहल्ला शेखजादगान निवासी निजी चिकित्सक ओमवीर मलिक (55), विशाल निवासी मोहल्ला खैल और मोहल्ला रायजादगान निवासी 30 वर्षीय फारुख है।
वहीं, घायल होने वालों में फूल सिंह, दयाराम, उज्जवल, बलवीर व याकूब रहे, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया है। हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ लगी रही और हाईवे पर वाहनों का आवागमन बंद रहा।
अमर उजाला ने चेताया, फिर भी नहीं जागा प्रशासन
एक युवक को कुचल कर तीव्र गति से आ रहे टैंकर के पलटने पर नीचे दबकर तीन की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हो गए। हादसे के लिए टैंकर चालक के साथ-साथ ही कुछ हद तक परिवहन विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदार है। अमर उजाला ने जिले के विभिन्न स्थानों पर दौड़ रहे ओवरलोड़, तीव्र गति से दौड़ रहे वाहनों को लेकर समय-समय पर प्रमुखता के साथ खबरें प्रकाशित कीं, लेकिन प्रशासन ने एक या दो दिन अभियान चलाने के बाद कोई ध्यान ही नहीं दिया। जिसके कारण लगातार जिले में हादसे हो रहे हैं।
अमर उजाला ने चार मार्च के अंक में मौत बनकर दौड़ रहे ओवरलोड वाहन, जिम्मेदार मौन नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद 30 मार्च के अंक में जिले में सड़कों पर दौड़ रहे बिना नंबर प्लेट और ओवरलोड वाहन नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी। जिसमें एआरटीओ रोहित राजपूत ने अभियान चलाकर कार्रवाई करने की बात कहीं थी। दो दिन तक अभियान भी ओवरलोड वाहनों के खिलाफ चला, मगर फिर से ओवरलोड वाहनों का संचालन पहले की तरह ही चालू हो गया।