परिवादी का कहना था कि उसका पुत्र विक्षित व पुत्री वंशिका स्कूल में कक्षा पांच व कक्षा दो में पढ़ते थे। स्कूल ने फरवरी व मार्च का भी शुल्क ले लिया लेकिन रसीद खत्म होने की बात कहकर परिवादी को रसीद नहीं दी थी। उसके बच्चों की परीक्षा मार्च में होनी थी, लेकिन प्रधानाचार्य ने शुल्क जमा नहीं होना बताकर बच्चों को परीक्षा से वंचित कर दिया गया। इससे परिवादी व उसके बच्चों को मानसिक व सामाजिक क्षति पहुंची।