शामली। जिले में वायरल के साथ अब डेंगू बुखार भी पांव पसार रहा है। जिला बनने के 10 साल बाद भी मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पाई। डेंगू की जांच के लिए सैंपल पहले मेरठ जाते थे और अब मुजफ्फरनगर भेजे जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट के लिए मुजफ्फरनगर के भरोसे रहना पड़ रहा है। वहां से रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन इंतजार करना पड़ता है।
सरकारी और निजी अस्पतालों में बुुखार के अधिकतर केस वायरल के आ रहे हैं। अब वायरल के साथ डेंगू बुखार का खतरा मंडरा रहा है। गांव बंतीखेड़ा में एक सप्ताह पहले 14 वर्षीय किशोरी की जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है, जबकि गांव कच्चीगढ़ी निवासी 35 वर्षीय महिला की बुखार से मौत हो गई थी। ऐसी स्थिति में जिले में डेंगू की जांच की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग एलाइजा जांच में पुष्टि होने पर ही रिपोर्ट प्रमाणित मानता है। पिछले साल तक डेंगू की जांच के लिए सैंपल मेरठ जाते थे, जहां से रिपोर्ट आने में एक सप्ताह से भी अधिक समय लगता था। लैब में सैंपल ज्यादा होने पर रिपोर्ट आने में और ज्यादा वक्त भी लगता था। अब एलाइजा जांच के लिए सैंपल मुजफ्फरनगर भेजे जा रहे हैं, लेकिन वहां से भी रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग रहे हैं।
अभी तक जिले से करीब 70 लोगों के सैंपल डेंगू की जांच को मुजफ्फरनगर भेजे जा चुके हैं। रिपोर्ट आने में देरी के चलते मरीज की जान खतरे में रहती है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार का कहना है कि जिले में एलाइजा जांच की अभी सुविधा नहीं है। लक्षण के आधार पर मरीज का उपचार शुरू कर दिया जाता है।