शामली में बासमती उगाने वाले किसान कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ। सौजन्य किसान
शामली। जिले में तैयार बासमती की 1121, 1509 किस्म की मांग विदेशों में सबसे अधिक है। विदेशों से लगातार शामली के बासमती चावल की मांग बढ़ रही है। पहली बार शामली के बासमती चावल को सऊदी अरब भेजा गया। जल्द ही कुवैत में सप्लाई की जाएगी, जिसकी तैयारी विभागीय अधिकारियों ने की है।
पिछले साल जिले में तैयार बासमती चावल को संभल की एक कंपनी के साथ एमओयू कर दुबई भेजा गया था, जबकि अन्य देशों में चावल भेजने की तैयारी थी। एफपीओ से जुड़े सुभाष सिंह, कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग के ज्येष्ठ विपणन निरीक्षक प्रदीप कुमार सैनी ने बताया कि अब यहां पर तैयार बासमती चावल की किस्म 1121, 1509, 1718 की मांग विदेशों में लगातार बढ़ रही है। दुबई, यूएई, ईरान के बाद अब सऊदी अरब, कुवैत में भी बासमती चावल का निर्यात किया जा रहा है। सऊदी अरब और अन्य स्थानों पर बासमती की 1509, 1121 की मांग सबसे ज्यादा है। पिछले साल 996 क्विंटल भेजा गया था। अब दोनों किस्मों की मांग लगातार बढ़ रही है। दो हजार क्विंटल से अधिक बासमती भेजा जा चुका है। जिले में 20 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती की खेती की जा रही है। अगले माह से किसान पौध लगाने का कार्य शुरू कर देंगे। अभी पैक्ड चावल को विभिन्न स्थानों पर बेचा जा रहा है। गुड़ और बासमती को मिला है जीआई टैग : प्रदीप कुमार ने बताया कि जिले के गुड और बासमती को जीआई टैग मिला हुआ है। लगातार दोनों उत्पादों को बेचने वालों की संख्या भी जिले में बढ़ रही है। जीआई टैग एक ऐसा नाम या चिह्न है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित उत्पाद की पहचान करता है। यह टैग उत्पाद की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा और अन्य विशेषताओं को क्षेत्र की भौगोलिक उत्पत्ति से जोड़ता है। संवाद