घर की जिम्मेदारी के साथ आजीविका भी चला रहीं महिलाएं
शामली। ग्रामीण महिलाएं भी अब आत्मनिर्भरता के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। गांवों में महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का स्वयं सहायता समूह अहम भूमिका निभा रहा है। इससे महिलाओं का जीवन स्तर पहले से बेहतर बन रहा है। आत्मनिर्भर महिलाएं घर संचालन में सहयोग प्रदान कर रही हैं। आत्मनिर्भर बनने से महिलाओं के जीवन में खुशियां आ रही हैं।
जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक 4665 समूहों का संचालन हो रहा है। जिनमें 51315 महिलाएं जुड़ी हैं। यह महिलाएं समूह के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही हैं। जिससे अच्छा मुनाफा भी कमा रही हैं। आचार, मुरब्बा, पापड़ बनाने के साथ ही खेती में भी हाथ आजमा रही हैं। इसके अलावा गांव के कई सहायता समूह दरी, चटाई, पायदान, कालीन व अन्य रोजगार में लगी हुई है।
स्वयं सहायता समूह की कलस्टर अध्यक्ष वैशाली का कहना है कि पहले गांव में ब्याज पर पैसे लेकर कुछ लोग अपना कारोबार शुरू करते थे, लेकिन ब्याज की ज्यादा दर के चलते नुकसान ही झेलना पड़ता था। अब कम ब्याज पर समूह महिलाओं को धन उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहे हैं। जिससे घर का खर्चा भी आराम से निकल जाता है।
स्वयं सहायता से जुड़ी मंटी हसनपुर निवासी मीनू ने बताया कि कोरोना के समय भी उनके समूह की महिलाओं ने काफी कार्य किया। सूखा राशन पैक कर आंगनबाड़ी केंद्रों पर सप्लाई किया। इसके अलावा मास्क का निर्माण करके बेचा। लड्डू गोपाल की पोशाक भी काफी बिकी।
कैराना के आर्यपुरी की रहने वाली गुलिस्ता भी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। वह दरी, कालीन, चादर आदि बनाती हैं। जिससे उनके परिवार को काफी सहायता मिलती है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त शैलेन व्यास का कहना है कि ग्रामीण महिलाएं अब आत्मनिर्भरता के मामले में काफी आगे आ रही हैं। शामली में 50 हजार से ज्यादा महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर परिवार की आजीविका भी चला रही हैं।
शामली के गांव मंटी हसनपुर में पोषण वाटिका के बारे में जानकारी देती महिला समहू की सदस्य- फोटो : SHAMLI
कैराना आर्यपुरी में दरी तैयार करती महिला समहू की गुलिस्ता- फोटो : SHAMLI
कांधला क्षेत्र के गांव पंजोखरा की वैशाली- फोटो : SHAMLI