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मिलावटी मावे से हो सकता है सेहत को नुकसान

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शामली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 30 अगस्त को मनाया जाएगा। इस त्योहार पर मावे की खपत ज्यादा होने के कारण गांवों और देहात में मावा तैयार करने की भट्ठियां धधकनी शुरू हो गई हैं। मावे की खपत को देखते हुए मुनाफे के लालच में मिलावटखोर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। जरा सी लापरवाही लोगों की सेहत के लिए भारी पड़ सकती है।
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इस तरह करें शुद्ध मावे की पहचान
- मिलावटी मावा आसानी से पानी में नहीं घुलता।
- मिलावटी मावे की गोली हथेली पर रगड़ने से फट जाती है।
- मिलावटी मावे में चीनी मिलाकर गर्म करने पर पानी छोड़ता है।
- मावे की गोली बनाकर आयोडीन टिंचर की दो बूंदे डालें, मिलावट होने पर पांच मिनट बाद रंग बदल जाएगा।
- हाथ या अंगूठे से रगड़ने से शुद्ध मावा घी छोड़ता और महक आती है।
- मिलावटी मावे में सूंघने पर अजीब सी खुशबू आती है।
- चखने पर मिलावटी मावा कड़वा या अजीब सा स्वाद लगता है।
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मावे में इस तरह होती है मिलावट
मिलावटी मावा तैयार करने में मिलावटखोर रिफाइंड, वेजिटेबल ऑयल और मिल्क पाउडर का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। इसके अलावा शकरकंद, सिंघाडे़ का आटा, आलू और मैदा मिलाया जाता है। वजन बढ़ाने के लिए आटा भी मिलाया जाता है। मिलावटी मावे को असली मावे जैसा दिखाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है।
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किडनी, लीवर पर होता है असर
शामली। चेस्ट स्पेशलिस्ट एवं कंसलटेंट फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि मिलावटी मावा या अन्य कोई भी मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पहले इसका असर आंतों पर होता है, जिससे आंतों में सूजन आना, गैस बनना, अपाच्य होना, पेट दर्द, उल्टी व दस्त हो सकते हैं। लंबे समय तक मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से गुर्दे पर और लीवर पर प्रभाव पड़ता है। उनका कहना है कि त्योहारों पर घर के बने खाद्य पदार्थ का सेवन करें और बाजार में बनी मिठाइयां या अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचे।
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खाद्य पदार्थों के 176 नमूनों में 54 अधोमानक मिले
शामली। खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने पिछले साल एक अप्रैल से 31 जुलाई तक 176 नमूने खाद्य पदार्थों के लिए, जिनमें करीब 54 नमूने अधोमानक पाए गए। विभागीय जानकारी के मुताबिक पिछले साल एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च तक 148 नमूने लिए गए थे। इनमें दूध के 30 नमूनों में 13 अधोमानक मिले। मावे के आठ नूमनों में तीन अधोमानक मिले। सरसों के तेल के छह नमूनों में एक नमूना फेल हुआ। मिठाई के 11 नमूनों में पांच अधोमानक मिले। विभाग की तरफ से एडीएम कोर्ट में 80 वाद दायर हुए, जिनमें 62 निस्तारित हुए, जिनमें 38 लाख 88 हजार का जुर्माना लगा। इस साल एक अप्रैल से 31 जुलाई तक 28 नमूने लिए गए, जिनमें अभी तक 22 की रिपोर्ट प्राप्त होने पर दूध के पांच, खोया का एक, सरसों के तेल के छह और अनाज के पांच नमूने अधोमानक पाए गए। एडीएम कोर्ट में 12 वाद दायर हुए, जिनमेें आठ का निस्तारण होने पर चार लाख 60 हजार रुपये जुर्माना लगा। जिला खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी विनय चतुर्वेदी का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की रोकथाम के लिए विभागीय टीम द्वारा निरीक्षण व सैंपल लेने की कार्रवाई की जाती है। मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
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