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कैराना से 346 परिवारों ने किया था पलायन, करीब 50 वापस लौटे

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कैराना से पलायन करने के बाद वापस लौटे व्यापारी मूला पंसारी की दुकान - फोटो : SHAMLI
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कैराना (शामली)। वर्ष 2014 में कैराना में आठ दिन में पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर सरिये की दुकान करने वाले दो ममेरे भाईयों शिव कुमार उर्फ शंकर व राजू तथा पुराने बिजली घर पर परचून व्यापारी विनोद सिंघल की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इससे बदमाशों से भयभीत कुछ व्यापारी कैराना से अन्य जनपदों व राज्यों में पलायन कर गए थे। तत्कालीन सपा मंत्री चितरंजन स्वरूप ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी की घोषणा की थी, लेकिन परिवारों को केवल 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता ही दी गई, जबकि नौकरी का वायदा पूरा नहीं किया गया। अगस्त 2014 में तीन व्यापारियों की हत्या के बाद दहशत के चलते कैराना से व्यापारी दूसरे राज्यों में पलायन करने लगे थे। मई 2016 में तत्कालीन भाजपा सांसद स्वर्गीय बाबू हुकुम सिंह ने कैराना से 346 परिवारों के पलायन करने की सूची जारी की थी। जिस पर काफी बवाल हुआ था। भाजपा ने पलायन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। जिसका सीधा फायदा भाजपा सरकार को मिला और वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी।
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- माहौल शांत होने पर 50 परिवार वापस लौटे
भाजपा सरकार में बदमाशों के एनकाउंटर होने लेगे तो करीब 50 परिवार वापस लौटे। जिनमें कोल्ड ड्रिंक का व्यापार करने वाले ईश्वरचंद उर्फ बिल्लू पुत्र पदम सेन निवासी बेगमपुरा से बदमाशों ने रंगदारी न देने पर जान से मारने की धमकी दी थी। जिसके बाद ईश्वर चंद और बिल्लू परिवार सहित पानीपत चला गया था। जहां पर कोल्ड ड्रिंक्स का काम शुरू कर दिया था। लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद वापस कैराना आ गया था। कोरोना में ईश्वर चंद्र व उसके बेटे नितिन की मौत हो गई थी। जबकि एक बेटा मोनू कैराना में अपना व्यापार चलाता है। पानीपत-खटीमा राजमार्ग पर सेनेटरी की दुकान करने वाले विक्की कंसल पुत्र श्यामलाल निवासी शंकर सोदियान पलायन कर देहरादून चला गया था। भाजपा सरकार बनने के बाद वापस कैराना आकर अपनी सेनेटरी की दुकान शुरू की। अशोक वर्मा पुत्र सुभाष चंद्र निवासी मोहल्ला गुंबद सर्राफा व्यापारी शामली चला गया था। वापस लौटकर दोबारा सर्राफा का व्यापार शुरू किया। सीमेंट व्यापारी रविंद्र सिंगल पुत्र दयाराम निवासी सरस्वती विद्या मंदिर मार्ग पलायन कर पानीपत चला गया था। जहां सीमेंट का कारोबार शुरू किया था, लेकिन अब वापस कैराना लौटकर सीमेंट की दुकान शुरू की। नीरज सिनेमा का मालिक मनीष मित्तल पुत्र रामकुमार निवासी टीचर्स कॉलोनी कोटा राजस्थान चला गया था। वापस आकर अपने बंद सिनेमा हॉल में कपड़े के थैले बनाने का कार्य शुरू किया। किराना की दुकान करने वाले विजय मित्तल व अभय मित्तल पुत्र अजय कुमार मित्तल मोहल्ला बेगमपुरा पलायन कर सूरत चले गए थे। जहां पर कपड़े का कारोबार शुरू किया था, लेकिन माहौल सही होने पर बड़े भाई विजय ने वापस कैराना आकर अपनी पंसारी की दुकान शुरू कर दी। जबकि छोटा भाई अभय मित्तल सूरत में कपड़ा का कारोबार करता है। साधु स्वीट्स की दुकान करने वाले राकेश कुमार गर्ग पुत्र साधू निवासी जोड़वा कुआं पलायन कर देहरादून चला गया था। जहां पर मिठाई का ही काम किया था, लेकिन आज माहौल शांत होने पर वापस आकर दोबारा अपना मिठाई का कारोबार शुरू किया। जबकि परिवार के अन्य सदस्य देहरादून में ही रहते हैं। तार व्यापारी राजकुमार निवासी मोहल्ला बेगमपुरा पलायन कर शामली शहर चला गया था। जहां पर तार का काम शुरू किया, अब वापस लौट गया। इनके अलावा कुछ अन्य व्यापारी भी कैराना वापस आकर अपना कारोबार कर रहे हैं।

शामली : कैराना में व्यापारी मूला पंसारी के पौत्र विजय मित्तल के आवास पर जातीं डीएम और एसपी।- फोटो : SHAMLI

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