शाहजहांपुर। चक्रवाती तूफान जवाद के उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के तटों से टकराने के बाद उसका असर पूर्वांचल से होकर रविवार देर रात यहां तक पहुंच गया। बीती शाम से वायुदाब में कमी के कारण आधी रात के बाद से बादल छाने लगे। सोमवार सुबह कुछ देर को ऐसा लगा कि धूप निकलेगी, लेकिन दोपहर तक बादल घने होने से शाम जैसा नजारा हो गया और बूंदाबांदी होने लगी। हालांकि, कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि मामूली बूंदाबांदी से फसलों को कोई नुकसान नही होगा, बल्कि इससे गेहूं की बढ़वार तेज होगी।
गत 23 नवंबर से रोजाना सुबह की तुलना में शाम को वायुदाब सामान्य से कई अंक अधिक बना रहा। इस कारण शाम को हवा की गति बढ़ने से अगले सुबह आसमान साफ होने पर दिन में दस बजे के बाद तक धूप निकलती रही, लेकिन चक्रवाती तूफान के प्रभाव से शनिवार शाम से उतार-चढ़ाव दिखने लगा। बीते दिन सुबह बैरोमीटर रीडिंग सामान्य से सात मिलीबार अधिक रही, लेकिन दिन ढलने तक बैरामीटर का पारा सामान्य से आठ अंक नीचे लुढ़क गया। इस कारण रात से बादल छाने शुरू हुए तो उमस महसूस होने लगी और न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री बढ़कर 12.3 डिग्री सेल्सियस हो गया।
सुबह दिन निकलने पर बादल छाए होने से मौसम बीते दिनों जैसा दिखा। सुबह धूप निकलने के आसार बने, लेकिन 11 बजे से बादल घने होने लगे। यही नहीं, दोपहर 12.30 बजे के बाद काली घटाओं से अंधेरा छाने लगा और बूंदाबांदी होने लगी। रिमझिम फुहारें कुछ मिनट तक बरसने के बाद थम गईं। एक घंटे बाद हवा चलने से बादल छटे तो सूरज की हल्की किरणें जमीन पर उतरीं, लेकिन बूंदाबांदी से वातावरण में बढ़ी आर्द्रता दिन ढलने के बाद सर्दी का अहसास कराने लगी।
गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह का कहना है कि देर शाम तक वायुदाब अधिक बना हुआ है, लेकिन पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मंगलवार को भी सुबह देर तक बादल छाए रहेंगे और इस दौरान बूंदाबांदी हो सकती है।
आज इतनी बूंदाबांदी नहीं हुई कि फसलों को कोई नुकसान की आशंका पैदा हो। जिन किसानों ने गेहूं की बुआई जल्दी कर ली है, उनकी फसल अब तेजी से बढ़वार लेगी। मटर समेत रबी सीजन की सभी दलहनी और तिलहनी फसलों और सब्जियों को भी बूंदाबांदी से नुकसान के बजाय लाभ होगा। यदि कई दिन तक मौसम ऐसा बना रहेगा और धूप कम निकली तो आलू की फसल झुलसा से प्रभावित हो सकती है, लेकिन यह आशंका नगण्य है। क्योंकि मौसम वेधशाला से प्राप्त डाटा विश्लेषण के अनुसार मौसम जल्द सामान्य होगा।
- डॉ. एनसी त्रिपाठी, प्रभारी अधिकारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।