शाहजहांपुर। बुखार का प्रकोप दिन प्रतिदिन विकराल होता जा रहा है। पिछले दो दिन में वायर बुखार के कारण एक पांच साल के बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई। रोजा क्षेत्र के गांव रामापुर सितौआ मजरा के बच्चे की मौत लखनऊ में एक अस्पताल में शनिवार दोपहर इलाज के दौरान हुई थी। परिजनों ने झोलाछाप पर गलत इंजेक्शन लगाने से मौत का आरोप लगाया है। सेहरामऊ दक्षिणी के गांव भरगवां निवासी फिरंकू (40) की जयपुर में स्टेशन पर बुखार से मौत हो गई। वहीं मिर्जापुर के गांव तिलहैया निवासी एक ग्रामीण की भी रविवार को बुखार से जान चली गई है।
थाना रोजा क्षेत्र के गांव रामापुर सितौआ मजरा निवासी इंद्रपाल का बेटा अमरेंद्र (5) को आठ सितंबर को तेज बुखार आया था। परिजन अमरेंद्र को गांव में एक झोलाछाप डॉक्टर के क्लीनिक पर इलाज के लिए ले गए थे। पिता का आरोप है कि क्लीनिक में बेटे को गलत इंजेक्शन लगा दिया गया, जिससे घर लाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। बच्चे को वापस क्लीनिक लेकर गए तो उसने इलाज से मनाकर दिया। हालत बिगड़ती देखकर इंद्रपाल बच्चे को लेकर पहले प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से पीजीआई, लखनऊ रेफर कर दिया गया। शनिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
परिजन शव लेकर शाहजहांपुर के रोजा थाना पहुंचे। इंद्रपाल के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई करने से मना करते हुए उनको वापस भेज दिया। रविवार को परिजन बच्चे का शव लेकर ऑटो से एसपी आफिस कार्रवाई की मांग करने के लिए जा रहे थे। सूचना मिलते ही थाने से चंद कदम की दूरी पर परिजनों को रोक लिया। वहां पर गांव के प्रधान और आरोपी झोलाछाप भी पहुंच गया। पुलिस के सामने ग्राम प्रधान और झोलाछाप परिजनों पर समझौता करने का दबाव बनाने लगे। बाद में पुलिस ने बच्चे के पिता की तहरीर पर आरोपी सुनील के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सेहरामऊ दक्षिणी के गांव भरगवां निवासी फिरंकू अपनी मां चमेली देवी के साथ भरगवां गांव में रहता था। पिता जय सिंह की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है। बेहद गरीब फिरंकू गांव और आसपास के गांवों में रहने वाले साथियों के साथ करीब दस दिन पहले जयपुर में मजदूरी करने गया था। साथ जाने वाले लोगों ने ग्रामीणों को बताया कि दस दिन पहले जब जयपुर आए थे तब फिरंकू को तेज बुखार आने लगा था। उसे वापस घर जाने के लिए कहा था। शनिवार को वह घर आ रहा था। जयपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर उसकी मौत हो गई।
फिरंकू के पास मिले आधार कार्ड और बैंक पासबुक से शिनाख्त कर रेलवे कर्मचारियों ने किसी तरह ग्रामीणों को सूचना दी। बेहद गरीब होने और परिवार में बूढ़ी मां के अलावा कोई न होने के कारण फिरंकू का शव उसके घर नहीं आ पा रहा था। ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा किया। फिरंकू के परिवार के कुछ सदस्य और ग्रामीण एंबुलेंस से जयपुर रेलवे स्टेशन से शव लाने के लिए रवाना हो गए हैं।
मिर्जापुर क्षेत्र के ग्राम तिलहैया निवासी जगवीर कुशवाहा ने बताया कि उसके छोटे भाई 42 वर्षीय रूपराम को कई दिन से बुखार आ रहा था। गांव के डॉक्टरों से दवा लेते रहे। रविवार सुबह करीब नौ बजे उनकी मृत्यु हो गई है। वह अविवाहित थे।