रामगंगा के घाटों पर गोताखोर नहीं थे तैनात
जैतीपुर क्षेत्र में स्थित रामगंगा नदी के प्रमुख घाटों पर सुरक्षा की भारी अनदेखी की जाती है। गंगा दशहरा पर 12 से अधिक गांवों के लोगों के उमड़ने के बावजूद यहां गोताखारों की प्रशासन की तरफ से तैनाती तक नहीं की गई थी। पुलिस भी नदारद थी। अगर सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होती तो तीनों किशोरों की जान बच सकती थी।
गढिया रंगीन में खूबपुर, अचिंतपुर और धुबला करीमनगर घाट पर गंगा दशहरा, कार्तिक और माघ पूर्णिमा पर लोग स्नान करने आते हैं। गढिया रंगीन, करीमपुर, रामपुर, पृथ्वीपुर समेत दर्जन भर गांवों के लोगों के आने के चलते घाटों पर मेला भी लगता है। इस वजह से बच्चों से लेकर महिलाएं भी आती हैं, फिर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए जाते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की व्यवस्था होनी चाहिए। नाव और गोताखोरों का इंतजाम भी होना चाहिए। गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए रस्सी से घेरा बनाया जाए। साथ ही सूचक बोर्ड भी लगाए जाए ताकि लोग गहरे में न जाएं।
प्रत्यक्षदर्शी बोले, खेल-खेल में हुआ हादसा
बेलाडांडी घाट पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का यह भी कहना कि विमल अपने दोस्तों के साथ गंगा स्नान के दौरान खेल कर रहा था। कुछ लोग गंगा के पुल से नीचे कूद रहे थे। इसी दौरान हादसा हुआ। यहां अव्यवस्था भी हावी रही। मात्र दो पुलिसकर्मी तैनात थे, जो किसी को रोकटोक नहीं रहे थे।
युवक पुल से छलांग लगाकर नदी में कूद रहे थे। यही कारण था कि कोई भी कहीं भी स्नान करने लगा था। इसी अव्यवस्था के चलते एक की जान चली गई। बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब प्रशासन की ओर से इस तरह बड़े पर्व पर लापरवाही बरती गई है।
विमल अपने दोस्तों के साथ रामगंगा नदी में स्नान कर रहा था। वह पुल के नीचे था। वहीं गंगा की धार के भंवर में फंसकर गहरे पानी में चला गया। यह देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया लेकिन वहां कोई गोताखोर मौजूद नहीं था। ज परिवार वाले कई गोताखोरों को लेकर मौके पर पहुंच गए। उसके बाद तलाश कराई गई। करीब तीन घंटे बाद युवक को बाहर निकाला जा सका, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी।
इकलौते बेटे विपिन की मौत से कोहराम
घासीराम के इकलौते बेटे विपिन की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। विपिन की मां सुनीता देवी दहाड़े मारकर रो पड़ीं। विपिन की बड़ी बहन रोशनी की शादी हो चुकी है। विवेक यादव की मौत से मां मीना देवी व छह बहनों व दो भाइयों का रो-रोकर बेहाल हो गईं। विवेक ने कक्षा नौ व विपिन ने 12वीं की परीक्षा इस वर्ष उत्तीर्ण की थी। दोनों में गहरी दोस्ती थी।