पुवायां। हादसे में घायल छात्र को पुलिस ने अस्पताल पहुंचाने के बजाय चौकी पर बैठा लिया। करीब दो घंटे बाद हालत बिगड़ने और ग्रामीणों के हंगामा करने पर छात्र को छोड़ा गया। इलाज के लिए शाहजहांपुर ले जाते समय उसकी मौत हो गई। शाम को परिजन ने पुवायां-शाहजहांपुर हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया। करीब तीन घंटे बाद जाम खोला गया।
गांव बड़ागांव निवासी ताराचंद्र का 18 वर्षीय पुत्र आसुख बृहस्पतिवार सुबह अपनी बहन किरन और फुफेरी बहन मुस्कान को बाइक से गांव बिलैया ले गया था। वह गांव के ही पंचायत राज इंटर कॉलेज में इंटर का छात्र था। दोपहर पौने बारह बजे घर लौटते समय बड़ागांव के पास कलंदरगंज मोड़ पर एक वृद्धा को बचाने के चक्कर में बाइक गिर गई। हादसे में वृद्धा और आसुख घायल हो गए। इसके बाद वह बाइक लेकर घर जा रहा था। तभी बड़ागांव पुलिस चौकी के दो सिपाही वहां पहुंचे और वृद्धा के साथ छात्र को चौकी ले गए। वृद्धा को पुवायां के सरकारी अस्पताल भेज दिया।
परिजन का आरोप है सिपाही राजेश और शिवम आसुख को दो घंटे तक चौकी में बैठाए रहे। सिपाही उसे छोड़ने के लिए दस हजार रुपये मांग कर रहे थे। दो बजे गांव के 20-25 लोग चौकी पहुंचे और हंगामा किया तो आसुख को छोड़ा गया, लेकिन उस समय उसके मुंह से झाग निकल रहे थे और नाक से खून भी आ रहा था। हालत गंभीर देख परिजन उसे शाहजहांपुर के निजी अस्पताल ले गए, जहां तीन बजे डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार के लोग शव लेकर घर पहुंचे। शाम छह बजे परिवार के लोगों ने शव पुवायां-शाहजहांपुर हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया।
सूचना पर पुलिस पहुंची और जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन परिवार के लोग पुलिस पर रिपोर्ट दर्ज करने और मुआवजे की मांग के बाद जाम खोलने की कहने लगे। रात पौने नौ बजे एससीएसटी आयोग के उपाध्यक्ष मिथलेश कुमार ने लोगों को समझाया। एसडीएम सुशांत श्रीवास्तव और सीओ बीएस वीर कुमार ने परिजन को कार्रवाई का आश्वासन दिया तो नौ बजे जाम खोल दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इंस्पेक्टर केबी सिंह का कहना है कि आसुख को चौकी पर नहीं रोका गया था। चौकी के सामने निजी डॉक्टर के यहां कुछ देर इलाज हुआ और बाद में उसे सीएचसी भेज दिया था, लेकिन सीएचसी पर आसुख को भर्ती कराने को कोई एंट्री नहीं है।
पुलिस पर लाठीचार्ज करने का आरोप, लोग घायल
आसुख के परिजन का आरोप है कि जाम की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शाम सात बजे लाठीचार्ज किया, जिससे आसुख के फूफा राममूर्ति के हाथ मे चोट लगी। कई अन्य के भी चोट लगी, लेकिन परिवार के लोगों ने इसके बाद भी शव नहीं हटाया।
सिपाहियों पर हो कार्रवाई, मिले मुआवजा
आसुख की मां उर्मिला देवी का आरोप है कि पुत्र के घायल होने के बाद भी सिपाही उसे चौकी पर जबरिया बैठाए रखे। यदि उनके पुत्र को समय से इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच सकती थी। पुत्र के मुंह से झाग और नाक से खून गिरने के बाद भी सिपाही नहीं पसीजे। उर्मिला देवी ने सिपाहियों पर रिपोर्ट दर्ज करने और 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। आसुख चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था। उसका एक छोटा भाई एक साल का है।
आसुख के परिवार के लोग जो आरोप लगा रहे हैं, उसकी जांच की जाएगी। आसुख के पिता अज्ञात में तहरीर दे रहे हैं। रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। परिवार के लोगों की हरसंभव मदद की जाएगी।
बीएस वीरकुमार, सीओ पुवायां