रोजा के हथौड़ा गांव के तालाब पर लोगों ने मकान बनाकर किया कब्जा । संवाद
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शाहजहांपुर। जो गांव मुख्य मार्गों के किनारे बसे हैं, वहां के तालाब या तो अवैध कब्जों से घिरकर रिहायशी क्षेत्र में बदल रहे हैं या फिर सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़ रहे हैं। जीआईसी तिराहा-अटसलिया क्रॉसिंग मार्ग को चौड़ा करने के लिए हथौड़ा गांव में तालाब के किनारे की जमीन ली गई तो वहां पर पहले से कब्जा जमाए ग्रामीणों का अतिक्रमण हटाने पर उन्होंने तालाब के पीछे की जमीन मिट्टी से पाटकर वहां अपनी दुकानें खड़ी कर लीं। उधर, जनपद के दूरस्थ ब्लॉक खुदागंज और मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांवों में कई पुराने तालाबों का भी अस्तित्व मिट रहा है। जिन तालाबों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर लाखों की रकम बहाई गई उनका भी कोई पुरसा हाल नहीं है।
भावलखेड़ा ब्लॉक में करीब पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले हथौड़ा गांव में दक्षिण-पूर्वी छोर पर सड़क के किनारे करीब 50 बीघा क्षेत्रफल का पुराना तालाब है। गांव के तमाम किसान पशु भी पालते हैं और यह तालाब पशुओं को नहलाने व उनकी प्यास बुझाने के काम आता रहा है। करीब एक दशक पहले गांव के ही कुछ लोगों ने सड़क के किनारे तालाब की जमीन पर कब्जा कर वहां टीन शेड डालकर अपने रिहायशी ठिकाने बना लिए। दो वर्ष पहले राज्य योजना से जीआईसी तिराहा-अटसलिया क्रॉसिंग मार्ग को चौड़ा करने का काम शुरू हुआ तो प्रशासन ने तालाब की जमीन से अवैध कब्जेदारों को बेदखल कर वहां सड़क की अतिरिक्त लेन बना दी।
जब तक इस मार्ग पर काम जारी रहा, तालाब से बेदखल किए गए लोग गांव के अंदर अपने मूल घरों में गुजर-बसर करते रहे, लेकिन सड़क बनने के बाद अधिकारियों का आवागमन थमा तो कब्जेदार फिर से सिर उठाने लगे। कई लोगों ने तालाब के पीछे की जमीन पाटकर समतल करने के बाद सड़क की ओर उसी जमीन पर पक्की दुकानें बना लीं। गांव के पूर्व प्रधान विरासत खां के अनुसार उन्होंने अपने कार्यकाल में लोगों को तालाब की जमीन छोड़ने को बहुत समझाया, लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ। हथौड़ा के वर्तमान प्रधान ओम प्रकाश को चुनाव जिताने में पूर्व प्रधान की बड़ी भूमिका रही, लेकिन उन्होंने अपने स्तर से तालाब को बचाने की अभी कोई पहल नहीं की है।
कई साल से उपेक्षित मझिला का ऐतिहासिक तालाब
खुदागंज। विकास खंड के मझिला गांव में ऋषिकुंज आश्रम के पास स्थित करीब 100 वर्ष पुराना ऐतिहासिक तालाब कई साल से उपेक्षित है। करीब तीन वर्ष पूर्व तालाब की साफ सफाई की गई थी। उस वक्त झाड़ियां साफ कराकर तालाब की सिल्ट निकाली गई और उसमें पानी भरवाया गया। इस तालाब की जिओ टैगिंग भी हुई, जिसके बाद कहा गया कि अब तालाब की जिला मुख्यालय पर बैठे अधिकारी निरंतर निगरानी कर सकेंगे, लेकिन हुआ इसका उल्टा। उसके बाद से तालाब पर कोई ध्यान नहीं दिए जाने से वह सूखकर पोखर जैसा बन गया। अब सरकार की अमृत सरोवर योजना के तहत इस तालाब के सुंदरीकरण की योजना बनाई गई है। खंड विकास अधिकारी ने बताया कि मनरेगा से बजट मिलने पर तालाब की सफाई और सीढ़ियों की मरम्मत कराकर इंटरलॉकिंग कराई जाएगी। साथ ही तालाब के चारों ओर पौधरोपण भी कराया जाना प्रस्तावित है। संवाद