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उम्मीद : 41 साल बाद पदक मिलने से बदलेंगे हालात

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शाहजहांपुर। टोक्यो ओलंपिक में बृहस्पतिवार को कांस्य पदक जीतकर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने सभी भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। इस जीत से खासतौर पर हॉकी खिलाड़ियों में जश्न का माहौल है। खिलाड़ियों का कहना है कि अच्छे संसाधन और सुविधाएं मिलने पर हॉकी का खोया गौरव फिर से वापस आ सकता है। 41 साल बाद देश को हॉकी में कोई पदक मिलने से उम्मीद है कि हालात बदलेंगे। भारतीय टीम को शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई देने के साथ ही लोगों ने सोशल मीडिया पर भी जमकर टीम की तारीफ की।
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हॉकी के सीनियर खिलाड़ी होशदार हसन खान का कहना है कि चार दशक पहले हॉकी में भारत का वर्चस्व हुआ करता था। धीरे-धीरे कर हालात ऐसे हो गए कि हमें 41 सालों तक एक पदक के लिए तरसना पड़ गया। इसके पीछे निश्चित तौर पर सरकारों का क्रिकेट के अलावा अन्य किसी खेल पर ध्यान न देना है। अब पुरुष हॉकी टीम ने पदक जीता है तो निश्चित तौर पर हालात बदलेंगे। शाहजहांपुर में कभी अच्छू खां ने टाउन हॉल क्लब के जरिये हॉकी को नई दिशा दी थी। उनके जाने के बाद सब बंद हो गया। स्पोर्ट्स स्टेडियम, हथौड़ा में सुविधाएं नहीं हैं, उम्मीद है कि अब हालात बदलेंगे।
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हॉकी खिलाड़ी कैफ खान का कहना है कि देश के कांस्य पदक जीतने से बहुत खुशी है। सभी खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई जिन्होंने जर्मनी जैसी मजबूत टीम को अपने आक्रामक प्रदर्शन से मात दी। सरकार को भी हॉकी के खिलाड़ियों के बारे में सोचना चाहिए। छोटे जिलों में हॉकी की अच्छी प्रतिभाएं संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देती हैं। बेहतर होगा कि ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जिसमें प्रतिभावान खिलाड़ियों को संसाधन मुहैया कराए जाएं। ऐसा होने पर हम पहले की तरह हर बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत सकेंगे।
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हॉकी खिलाड़ी विष्णु दीक्षित ने कहा कि इससे ज्यादा गर्व की बात क्या हो सकती है कि 41 साल बाद पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक जैसी विश्वस्तरीय प्रतियोगिता में मजबूत टीमों को हराकर पदक जीता है। भारतीय टीम के खिलाड़ियों के जुझारूपन को सलाम। उन्होंने बहुत शानदार प्रदर्शन किया है। टीम में अधिकतर खिलाड़ी छोटे जिलों से है। ऐसे में अगर छोटे शहरों की प्रतिभा को सही प्लेटफार्म मिले तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में भारत फिर से विश्वस्तर पर हॉकी में अपनी धाक जमा सकता है। शाहजहांपुर शहर में ही हॉकी के लिए सुविधाओं का घोर अभाव है। इस ओर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।
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हॉकी खिलाड़ी निजाम अली खान ने बताया कि बहुत गर्व महसूस हो रहा है। नई पीढ़ी को तो मालूम भी नहीं कि कभी ओलंपिक में स्वर्ण पदक पर केवल भारत का कब्जा हुआ करता था। आज यह हालत है कि हम 41 साल बाद ओलंपिक में कांस्य पदक जीत पाए हैं। निश्चित तौर पर प्रतिभावान खिलाड़ी तैयार नहीं किए गए। उम्मीद है कि अब भारत सरकार इस ओर ध्यान देगी और खिलाड़ियों को संसाधन मुहैया कराएगी ताकि हम अपना खोया हुआ गौरव फिर से प्राप्त कर सकें। शाहजहांपुर जैसे शहर में न तो ढंग का हॉकी स्टेडियम है और कोच तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इस ओर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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