शाहजहांपुर। दीपावली का त्योहार नजदीक है, जिसके चाहिए शहर से लेकर गांव तक कुंभकारों द्वारा मिट्टी के दीये तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही गाय के गोबर से निर्मित दीये भी बाजार में उपलब्ध हैं। इस बार कुंभकारों को दीपावली पर दीयों की अच्छी खरीदारी की उम्मीद है। दीपावली के दिन हर तरफ दीये, मोमबत्ती और रंग बिरंगी लाइटों की जगमगाहट देखने को मिलती है।
अब लोगों में जागरूकता बढ़ी है और मिट्टी के दीयों को महत्व देना शुरू कर दिया है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में रहने वाले कुंभकारों ने घरों में मिट्टी के दीये तैयार करने शुरू कर दिए हैं। उन्हें उम्मीद है कि धनतेरस से लेकर दिवाली तक लोग दीयों की जमकर खरीदारी करेंगे। इससे उनके घर भी त्योहार की खुशियां भर जाएंगी। साथ ही दीपावली पर पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश व कुबेर जी की मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं। इन्हें सजाकर बाजार में बिकने के लिए रखा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इलेक्ट्रॉनिक चॉक देकर हम लोगों का कल्याण किया है। इससे उत्पादन भी बढ़ा है। लेकिन अब शहर में मिट्टी मिलना मुश्किल होता है और बिजली का बिल भी ज्यादा आता है। ऐसे में मुनाफा कम ही मिल पाता है। बताया कि यह उनका पुश्तैनी कार्य है। उन्होंने इस बार 10-15 हजार दीये तैयार किए हैं। उम्मीद है कि धनतेरस से लेकर दीपावली तक सभी बिक जाएंगे। - राजकुमार प्रजापति, कुं भकार
पहले और अब कार्य करने में थोड़ा अंतर आ गया हैं। महंगाई काफी बढ़ गई है। अब लोग मोमबत्ती और बिजली की लाइटें जलाना पसंद करते हैं। शगुन के लिए 100-50 दीये लेकर जाते हैं। उसी से ही उनका काम चल जाता है। जबकि पहले लोग 500 से 1000 दीया लेकर मकानों को रौशन करते थे। इस बार दीपावली पर दीयों की मांग अच्छी रहने की संभावना है। पांच हजार दीये तैयार किए हैं। - राजू प्रजापति, कुं भकार
उम्मीद तो हैं, लेकिन हम लोगों को मिट्टी नहीं मिल रही है। मिट्टी का दाम 1000 से 1200 रुपये लड़ी है। प्रधानमंत्री ने हम लोगों को इलेक्ट्रॉनिक चॉक तो दे दिया, लेकिन मिट्टी और बिजली के बिल की हम लोगों की समस्या है। फिर भी हमें उम्मीद है कि इस वर्ष कारोबार ठीक चलेगा। हम माटी कला केंद्र भी चलाते हैं। मिट्टी के बर्तन, स्टूल व अन्य उत्पाद भी तैयार कर रहे हैं। जिनकी मांग हो रही है। - सुरजीत कुमार, कुं भकार
मिट्टी के दीयों के साथ ही बाजार में गाय के गोबर से निर्मित मूर्तियां और दीये भी लोगों की पसंद बन रहे हैं। यह दीये और मूर्तियां इको फ्रेंडली हैं यानि इनसे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है। प्रदेश सरकार के पर्यटन व संस्कृति विभाग की ओर से खिरनीबाग मैदान में मेले में गाय के गोबर से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और दीये उपलब्ध हैं। साथ ही बाजार में भी उपलब्ध होंगे। - मनोज कश्यप, दीया व मूर्ति निर्माता