शाहजहांपुर। चौतरफा मंहंगाई का शोर मच रहा है। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से ढुलाई भाड़ा बढ़ा और उसी अनुपात में बाहर से आने वाली खाद्य वस्तुएं भी महंगी होने लगी। दाल और खाद्य तेलों के दाम गत एक वर्ष से बढ़ रहे हैं, लेकिन दो माह पहले दालों के भाव कुछ कम हुए थे। अब त्योहार पर मांग बढ़ने से ब्रांडेड सरसों तेल, रिफाइंड ऑयल, वनस्पति घी, दालें, बेसन आदि के दाम चढ़ रहे हैं। पांच माह पहले की तुलना में खाद्य तेलों के भाव पांच से दस फीसदी बढ़े हैं।
गत वर्ष अगस्त तक अरहर दाल के दाम 60 से 65 रुपये प्रतिकिलो थे। अब 90 से 110 रुपये के भाव है। मसूर समेत उड़द, चना, मूंग, लोबिया आदि दालों के दाम भी बीते पांच माह में 10 से 15 फीसदी बढ़े हैं। यही नहीं, गत वर्ष इन्हीं दिनों में 85 से 90 रुपये किलो बिकने वाला सरसों तेल बीते वर्ष अगस्त में 125 रुपये किलो तक उछाल लेने के बाद सस्ता हुआ, लेकिन अब 195 से 205 रुपये किलो बिक रहा है। जब दालों ने आम आदमी की थाली से दूरी बनानी शुरू की तो मध्यवर्गीय परिवारों की रसोई में सब्जियों की खपत बढ़ाई, लेकिन खाद्य तेलों पर महंगाई के चलते लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि रसोई का खर्च कैसे सीमित किया जाए।
दाल और खाद्य तेलों के भाव (रुपये प्रति किलो)
वस्तु अप्रैल 2021 के भाव वर्तमान भाव
अरहर 90-100 100-110
उड़द 85-90 90-110
मूंग 90-100 110-115
मसूर 80-90 100-110
उड़द धुली 110-100 120-125
चना 60-70 70-80
मटर 60-65 80-90
रिफाइंड तेल 140-145 150-155
सरसों तेल 145-150 195-205
चीनी 38-40 40-42
जब दालें महंगी होनी शुरू हुई तो लोगों ने घरों में सब्जियों की खपत बढ़ाई, लेकिन अब खाद्य तेल विशेषकर सरसों के तेल के भाव आसमान पर जा रहे हैं। गरीब परिवारों को गुजारा करना कठिन हो रहा है। -पंकज कनौजिया, बिसरात घाट
पिछले साल लाकडाउन में दालों समेत आलू, प्याज के दाम बढ़ने पर कीमतें नियंत्रित करने के लिए सरकार ने मंडियों में फुटकर बिक्री के अपने काउंटर खुलवाए थे। अब सस्ती दर पर तेल बिक्री के काउंटर खुलने चाहिए। -अमित कुमार, बाबूजई
गनीमत है कि हरी सब्जियों के दाम ज्यादा नहीं चढ़े, लेकिन दालें और खाद्य तेल आम आदमी से दूर हो रहे हैं। इन चीजों की खरीदारी करना मजबूरी क्योंकि दाल और सब्जी के बगैर रोटी खाना कठिन होगा। -भरत सिंह, अंजान चौकी
पिछले साल लॉकडाउन के बाद से सरकार गरीब परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न बांट रही है, लेकिन अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से रोकने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है। इससे घरेलू खर्च बढ़ रहे हैं। -अमर नाथ, खलीलशर्की
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि दक्षिणी राज्यों में बाढ़ के कारण दलहन और तिलहन की फसलें खराब हो गईं। इन चीजों की आवक भी कम हो गई है। डीजल के बढ़ते दामों से ट्रांसपोर्टर मालभाड़ा भी बढ़ा रहे हैं। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है। -संजीव गुप्ता, थोक किराना कारोबारी, बहादुरगंज गल्ला मंडी