शाहजहांपुर। ऑनलाइन पढ़ाई में देर तक ईयरफोन का इस्तेमाल व तेज आवाज में संगीत सुनने की आदत ने बच्चों को कान का रोगी बना दिया। ईयरफोन का इस्तेमाल करने की वजह से पिछले एक साल से बच्चों के कान में सनसनाहट की समस्या होने लगी है। इन बच्चों की उम्र 13 से 16 वर्ष के बीच है। उपचार के दौरान सामने आया कि लगातार मोबाइल के ईयरफोन का इस्तेमाल बच्चों के कानों में दिक्कत पैदा कर रहा है। दूसरी ओर बड़ों में डायबिटीज और रक्तचाप की समस्या होने पर कानों पर असर पड़ने लगा है।
कोरोना के दस्तक देने के बाद शिक्षण संस्थाओं को बंद कर ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प दिया था। हर स्कूल ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कराई। ऐसे में ईयरफोन का इस्तेमाल लगातार करने व अधिक शोरगुल में रहने वाले बच्चों के कानों में सनसनाहट की समस्या पैदा हो गई। डाक्टरों के पास ऐसी समस्या वाले बच्चों के ज्यादातर केस सामने आ रहे हैं। ईयरफोन का इस्तेमाल से कान की नसें कमजोर होने से बहरेपन की शिकायत होने लगी है। इसी तरह कान में संक्रमण के मरीज भी बड़े पैमाने पर बढ़ गए हैं। बच्चों में सर्दी, जुकाम या शारीरिक रूप से कमजोर होने के चलते कानों पर असर पड़ा है। लंबे समय तक जुकाम रहने से बच्चों के कान खराब हो रहे। पर्दे में छेद और कान बहने की समस्या भी आ रही है। संवाद
डायबिटीज और ब्लड प्रेशर से कम सुनने लगे लोग
पहले लोग बुढ़ापे पर बहरेपन का शिकार होते थे। लेकिन, अब 40 से 45 की उम्र पार करते ही डायबिटीज और ब्लडप्रेशर के मरीजों के सुनाई देने की क्षमता कम होने लगी है। अनियंत्रित ब्लड प्रेशर वाले मरीजों के कान की नसों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। अनियमित दिनचर्या और बीमारियों के कारण कान के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
ये बरतें सावधानी
- कान के साथ छेड़छाड़ बिल्कुल भी नहीं करें।
- अपने कानों को जबरन साफ न करें।
- तीली या बड को कान में बार-बार डालकर साफ करने से बचें।
- उम्र बढ़ने पर ब्लडप्रेशर और डायबिटीज की नियमित जांच कराएं।
- डायबिटीज के कंट्रोल में न होने पर दवाईं लें, अन्यथा कान पर असर पड़ेगा।
- कम सुनाई देने पर मोबाइल का ईयरफोन लगाकर खुद ही जांच कर सकते हैं।
ईयरफोन को लगातार लगाए रहने की वजह से बच्चों के कानों पर काफी प्रभाव पड़ा है। कक्षा नौ से 12 तक के बच्चों के कानों में सनसनाहट की समस्या अधिक हो रही है। पहले इस तरह के मरीज बहुत कम आते थे। पिछले कुछ कान में दिक्कत के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। कम सुनाई देने पर हियरिंग एड का इस्तेमाल जरूर करें। - डॉ. पूनम ओमर, विभागाध्यक्ष ईएनटी, राजकीय मेडिकल कॉलेज