शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव के तहत श्रीराम कथा के छठवें दिन बुधवार को व्यास विजय कौशल महाराज ने नारद उद्धार का प्रसंग सुनाया। श्रीराम कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। व्यास ने कहा कि संतों की सेवा और संत संगति से हरि भक्ति में मन लगता है।
उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा साक्षात रूप में प्राप्त होती है। ऐसी भक्ति कीजिए कि आप भगवान से एक क्षण को भी विमुख न हों। बोले कि भक्त की पुकार सुनकर प्रभु लीलावतारी अलग-अलग रूपों में भक्त का उद्धार करने चले आते हैं। नारद मुनि का उद्धार करने के लिए भगवान विष्णु ने विश्व मोहनी के स्वयंवर की लीला रची थी। विश्व मोहनी को देखकर उन्हें विवाह करने का विचार आ गया। उन्होंने भगवान विष्णु से उनके जैसा सुंदर मांगा तो नारद के भीतर उपजी मोह माया को देख भगवान विष्णु ने बंदर का मुख दे दिया।
इसकी वजह से विश्व मोहनी ने नारद की तरफ देखा तक नहीं। तालाब में अपना मुख देखने पर नारद को हकीकत का पता चला और क्रोध में भगवान विष्णु को नारी के पीछे-पीछे दौड़ने का श्राप दे दिया। जब विष्णु भगवान अपनी माया को दूर कर देते हैं तो नारद अपने वास्तविक रूप में आकर पश्चाताप करते हैं। इस तरह से विष्णु भगवान अपनी लीलाओं के द्वारा भक्तों का उद्धार करते हैं। कथा के समापन पर आरती व प्रसाद वितरण हुआ।
इस मौके पर प्रमोद चंद्र सेठ, डॉ. रवि मोहन, विधायक चेतराम, राधे गोविंद मोदी, रवि गोयल, बलवीर सिंह, कमांडो अनिल सिंह, अशोक अग्रवाल, डॉ. एसके सिंह, अशोक अग्रवाल, अनिल वर्मा, सुधीर गुप्ता, महेंद्र कौशल, अनीता कौशल, पूनम गुप्ता आदि मौजूद रहे।
संगीत संध्या का आयोजन व छायाचित्र प्रदर्शनी लगी
कथा के बाद सुगम संगीत संध्या का आयोजन हुआ। डॉ. प्रतिभा सक्सेना, डॉ. कविता भटनाग की देखरेख में छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुतियां दी। चित्रकला विभाग की ओर से डॉ. अर्चना गर्ग के संयोजन में मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती के 75 वर्ष की समर्पण की यात्रा को छायाचित्रों के माध्यम से सजीव करने को प्रदर्शनी लगाई गई।