शाहजहांपुर। जनपद में दलहनी व तिलहनी फसलों के उत्पादन को सहफसली खेती के तौर पर प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार के नियोजन विभाग की उच्चस्तरीय टीम दो दिन के दौरे पर बुधवार को यहां पहुंची। चार सदस्यीय टीम में वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार के नेतृत्व में आए अधिकारियों ने पहले दिन जिले में भावलखेड़ा ब्लॉक के उन कई गांवों का भ्रमण किया, जहां वर्तमान में गन्ना के साथ दलहनी और तिलहनी फसलें बोई गई हैं। अनुमान है कि जिले में दलहनी का तीन हजार हेक्टेयर और तिलहनी फसलों का दस हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल सहफसली खेती के तौर पर आच्छादित है, लेकिन सरकार की मंशा है कि सहफसली खेती के क्षेत्रफल में दो से तीन गुना वृद्धि हो सके।
टीम में सहायक सांख्यिकी अधिकारी वर्तिका, डॉ. आनंद कुमार और अमरजीत भी शामिल हैं। यहां पहुंचने पर जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव के साथ अधिकारियों ने पहले जलालपुर गांव जाकर किसान रामसूरत के खेत पर गन्ना के साथ बोई गई मूंगफली की फसल का निरीक्षण किया। सिउरा गांव के किसान अनुज सिंह और आटा खुर्द के विजय के गन्ना के खेतों में की जा रही मूंग और सरसों की खेती का जायजा लिया।
बरतारा सर्किल में मूंगफली देख अचंभित हुए अधिकारी
किसान रामसूरत ने बताया कि गन्ना विकास विभाग के अधिकारियों की प्रेरणा से वह पिछले दो वर्ष से गन्ना के साथ मूंगफली की खेती कर रहे हैं और इस वर्ष उनसे प्रेरित होकर बरतारा सर्किल के अन्य किसानों ने भी करीब पांच एकड़ क्षेत्रफल में मूंगफली बोई है। अभी तक यह फसल जनपद की सिर्फ जलालाबाद, कलान तहसीलों में ही उगाई जाती रही है। उन्होंने बताया कि मूंगफली की खेती से आमदनी मिलने के साथ खेत की मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बन तत्व बढ़ने से गन्ना की प्रति इकाई औसत पैदावार भी बढ़ रही है। डीसीओ डॉ. भार्गव ने टीम में शामिल अधिकारियों को बताया कि जनपद में करीब दो लाख गन्ना किसान हैं और उनमें से लगभग दस हजार किसान सहफसली खेती कर रहे हैं।
सहफसली पर मिल रही प्रोत्साहन धनराशि
डीसीओ ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत गन्ना के साथ सहफसली खेती करने वाले ऐसे सभी किसानों को आठ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर प्रोत्साहन स्वरूप डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके खाते में भेजे जाते हैं। किसानों ने अधिकारियों को यह भी बताया गया कि उन्होंने जैविक खादों का प्रयोग किया और बीज बोने से पहले कवकनाशी से उन्हें उपचारित किया।
अधिकारियों ने किसानों को बताया रोल मॉडल
इन किसानों से केंद्रीय टीम के अधिकारी काफी प्रभावित हुए और उन्हें अन्य किसानों के लिए रोल मॉडल बताया। उन्होंने संबंधित किसानों से कहा कि वह गांव के ऐसे अन्य किसानों से भी अनुभव साझा करें जो अपने खेतों में सिर्फ गन्ना की खेती कर रहे हैैं। अधिकारियों के भ्रमण के दौरान रोजा चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक बृजेश शर्मा, विकास प्रमुख अक्षय श्रीवास्तव, रोजा के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक डॉ. सुनील कुमार कनौजिया, सर्किल इंचार्ज बबलू कुमार व आशीष कुमार, किसान प्रेम पाल, सियाराम, राम निवास, राम सिंह, रवींद्र कुमार आदि मौजूद रहे।