शाहजहांपुर। अपर सत्र न्यायाधीश सिद्घार्थ कुमार वागव ने हत्या के जुर्म में पिता-पुत्र समेत चार मुजरिमों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पिता-पुत्र समेत तीन दोषियों को एक-एक लाख और चौथे दोषी लईक को 50 हजार रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार शहर के मोहल्ला हयातपुरा निवासी पारब्रह्म सक्सेना के मामा 55 वर्षीय शंभूदयाल उसी मोहल्ले में रहते थे। पारब्रह्म सक्सेना के मुताबिक शंभूदयाल झाड़-फूंक करते थे। 14 मई 2015 को मामा शंभूदयाल ने फोन करके चिनौर चलने की कहकर पारब्रह्म को अपने घर बुला लिया। इसी बीच एक व्यक्ति शंभूदयाल के घर पहुंचा अपनी पत्नी की तबीयत खराब बताकर दिखाने को कहने लगा। उसने तब अपना नाम सलीम बताया था। शंभूदयाल ने उसका मोबाइल नंबर लिया और कहा कि फोन करके आएंगे। पारब्रह्म और उनके मामा शंभू दयाल शाम छह बजे कुम्हारों वाली गली के पास पहुंचे। वहां सलीम पहले से खड़ा था। वह शंभूदयाल को लेकर पैदल चला गया और पारब्रह्म वहीं खड़े रहे।
काफी देर इंतजार करने के बाद पारब्रह्म सक्सेना ने मामा शंभूदयाल को फोन किया। तब शंभूदयाल ने बताया कि उन्हें सलीम ने गोली मार दी है। वह ककरा के कब्रिस्तान में पड़े हैं। पारब्रह्म फौरन कब्रिस्तान गए और शंभूदयाल को ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने सलीम के खिलाफ सदर बाजार थाने में केस दर्ज किया। जहां इलाज के दौरान शंभूदयाल की मौत हो गई।
पुलिस ने विवेचना के बाद हरदोई के पिहानी थाना क्षेत्र के गांव हन्न पसगवां निवासी कलक्टर, उसके पुत्र रूपेश, आजाद और मुरीदखानी गांव निवासी लईक के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। पुलिस की छानबीन में पता चला कि लईक ही सलीम बनकर शंभूदयाल को बुलसका अपने साथ ले गया था। गवाहों के बयान और सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा व दीप कुमार गुप्ता की दलीलों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी कलक्टर, उसके बेटे रूपेश, आजाद और लईक को दोषी मानते हुए चारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।