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राहतः अब किसी अस्पताल में कोरोना संक्रमित नहीं

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शाहजहांपुर। पिछले चार दिन से जिले में कोरोना संक्रमित एक भी मरीज नहीं मिला है। सक्रिय मरीजों की संख्या सिर्फ चार रह गई है। राहत भरी खबर यह भी है कि अस्पतालों में अब एक भी मरीज भर्ती नहीं है। हालांकि खतरा अभी टला नहीं है। तीसरी लहर के मद्देनजर सावधानी बरती जानी जरूरी है। इसके बावजूद तमाम लोग अब भी कोविड-19 की गाइडलाइन का उल्लंघन कर घूम रहे हैं।
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मार्च में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की शुरुआत हुई थी। धीरे-धीरे कर संक्रमण फैलने से हजारों लोग शिकार बने। कई लोगों की मौत से दहशत का माहौल रहा। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को प्राइवेट अस्पतालों को कोविड अस्पताल बनाना पड़ा था। इसके बावजूद मरीजों को अस्पतालों में भर्ती होने के लिए बेड नहीं मिल रहे थे। 11 से लेकर 15 मई के बीच राजकीय मेडिकल कॉलेज में बने एल-टू आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू में 150 से ज्यादा मरीज भर्ती थे। बेड न मिलने की शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ने सत्यानंद अस्पताल, ओसीएफ अस्पताल और वरुण-अर्जुन मेडिकल कॉलेज को कोविड अस्पताल बनाया था। धीरे-धीरे कोरोना का प्रकोप कमजोर पड़ने लगा। प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या घटने लगी। मंगलवार को जिले में सक्रिय कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या महज चार रह गई। राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती अंतिम मरीज को सोमवार शाम को छुट्टी दे दी गई। कुछ ही दिन में जिला कोरोना मुक्त हो जाने की उम्मीद है।
अब तक कुल मरीजों की संख्या - 20335
स्वस्थ मरीजों की संख्या - 19939
सक्रिय मरीजों की संख्या - 04
अब तक हुई मृत्यु - 401
खतरा अभी टला नहीं, वैक्सीनेशन है जरूरी
सीएमओ डॉ. एसपी गौतम ने अपील की है कि भले ही कोरोना संक्रमिण चार मरीज बचे हैं लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। कोरोना से बचने के लिए तीन मंत्र बेहद आवश्यक हैं। मास्क लगाना, हाथों को बार-बार धोना और सामाजिक दूरी बनाकर रखना। तीसरी लहर को कमजोर करने के लिए वैक्सीनेशन कराना बेहद जरूरी है। करीबी सेंटर पर जाकर परिवार के हर सदस्य का टीकाकरण कराएं ।
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तीसरी लहर के लिए सौ बेड की व्यवस्था
राजकीय मेडिकल कालेज की प्रवक्ता डॉ. पूजा त्रिपाठी ने बताया कि आईसोलेशन वार्ड में 158 बेड हैं। इनमें से सौ बेड तीसरी लहर से निपटने के लिए अलग कर दिए गए हैं। पचास बेड आईसोलेशन और पचास बेड का आईसीयू बनाया जाएगा।
दूसरी लहर की भयावहता से सबक लेकर सजग रहें लोग
शाहजहांपुर। जनपद में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप थमने के बाद भले ही सक्रिय मामले दहाई तक सीमित रह गए हों, अभी महामारी का खतरा टला नहीं है। ऐसे में कोरोना गाइडलाइन को भुलाकर बाजारों में घूमना संक्रमण को बुलावा देना जैसा होगा। समाज के प्रबुद्घ वर्ग से बात करने पर सभी ने यही राय दी कि सरकार के साथ आम लोगों को भी कोरोना की संभावित तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए सजगता बनाए रखने के प्रयास करने होंगे।
विश्व स्तर पर कोरोना का खतरा बरकरार है। फ्रांस समेत यूरोप के कई देशों में महामारी की तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। अपने देश में भी कोरोना का नया वैरिएंट आ चुका है। इसलिए जो लोग मास्क लगाए बगैर बाजारों में घूम रहे हैं, उनके लिए ईश्वर से बुद्धि देने की प्रार्थना की जा सकती है। ऐसे लोग खतरे में पड़े तो सरकार को कोसेंगे, जबकि सरकार कोरोना को मिटाने के लिए पहले से प्रयासरत है। -जसविंदर सिंह बजाज, पूर्व अध्यक्ष, सेंट्रल बार एसोसिएशन
शाम के समय बाजारों में भीड़ का नजारा कोरोना को देखते बहुत खतरनाक संकेत है। मास्क लगाए बगैर भीड़ का हिस्सा बनने वाले लोग एक तरह से अपनी मौत को बुलावा दे रहे हैं। तीसरी लहर के बारे में सुनकर ही डर महसूस होता है। कोरोना गाइडलाइन का पालन हर किसी के लिए जरूरी है। बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्गों के लिए बाहर का माहौल इतना खराब हे कि वह घर पर ही खुद को सुरक्षित रखें। - डॉ. अवधेश मणि त्रिपाठी, वरिष्ठ योग प्रशिक्षक
कोरोना जब भी बढ़ता है, सबसे ज्यादा व्यापारी त्रस्त होते हैं। इसलिए मास्क लगाए बगैर घूमने वालों से अनुरोध है और वह अपना और दूसरों का जीवन खतरे में नहीं डाले। अधिकतर ई-रिक्शा और ऑटो थ्री व्हीलर चालक मास्क लगाए बगैर सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इस बारे में संगठन की ओर से पुलिस अधिकारियों को भी जल्द ज्ञापन दिया जाएगा। - कुलदीप सिंह दुआ, व्यापारी नेता
कोरोना की दो लहर आ चुकी हैं। पिछले साल पहली लहर बीतने पर लोगों ने महामारी को भुला दिया, लेकिन दूसरी लहर का तांडव किसी से छिपा नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर की भयावहता को वही लोग समझ सकते हैं, जिन्होंने उसे भुगता और अपनों को खोया है। सब कुछ सरकार नहीं कर सकती और सरकार आखिर कितना कर सकती है। तीसरी लहर आने से पहले लोग सचेत हो जाएं तो बेहतर होगा। - संजय चोपड़ा, पूर्व अध्यक्ष, लायंस क्लब
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