शाहजहांपुर। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला करने वाला साबित होगा। टिकट की दावेदारी कर रहे लोगों को अपने जनबल का प्रदर्शन करना होगा, ताकि उनके टिकट का रास्ता साफ हो। पिछले चुनाव में जिले की एकमात्र जलालाबाद सीट हारी भाजपा बहुत सोच-समझ कर टिकट फाइनल करने के मूड में है। सीएम योगी का दौरा चुुनाव लड़ने का दावा कर रहे संभावित प्रत्याशियों की छंटनी भी कर देगा।
2017 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों पर क्लीन स्वीप का सपना सपा ने जलालाबाद में तोड़ दिया था। लहर के बावजूद समाजवादी पार्टी के शरदवीर सिंह ने भाजपा को जलालाबाद में चारों खाने चित कर दिया था। हालांकि पहले भी कभी जलालाबाद में कमल नहीं खिल सका था। यही वजह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने नौ नवंबर को जनसभा के लिए जलालाबाद को चुना है।
मुख्यमंत्री जलालाबाद के साथ ही शहर के खिरनीबाग रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करेंगे। सीएम के सामने रैली में जबरदस्त भीड़ उमड़े, इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों के साथ ही जलालाबाद विधानसभा क्षेत्रों में टिकट की दावेदारी कर रहे लोगों के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। टिकट ऐसे ही नहीं मिलेगा।
अपना जनबल साबित करना पड़ेगा। टिकट के दावेदार को कम से कम एक हजार लोगों को सभा तक लाना होगा। वर्तमान में लगभग दस लोग भाजपा के टिकट का दावा करते हुए क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे हैं। इस बहाने विधानसभा चुुनाव लड़ने के कमजोर उम्मीदवारों की छंटनी हो जाएगी।
कैबिनेट मंत्रियों पर रैली की सफलता की जिम्मेदारी
शाहजहांपुर में दो कैबिनेट मंत्री हैं। एक वित्त, चिकित्सा शिक्षा एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और दूसरे प्राविधिक शिक्षा मंत्री जितिन प्रसाद। दोनों का ही प्रदेश की राजनीति में बड़ा कद रखते है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी की जनसभा की सफलता की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा दोनों के कंधों पर है। सुरेश कुमार खन्ना लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं जितिन प्रसाद भी रविवार को जलालाबाद, मिर्जापुर, अल्हागंज और कलान के दौरे पर रहकर कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश देते रहे।
मौजूदा विधायकों के सामने भी चुनौती कम नहीं
माना जा रहा है कि आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिले की पुवायां, तिलहर, कटरा और ददरौल सीट पर वर्तमान विधायकों के टिकट को लेकर सीएम योगी समीक्षा करेंगे। लगभग पांच सालों में किए गए विकास कार्यों के साथ ही मौजूदा लोकप्रियता टिकट देने का आधार होगा। यह भी देखा जाएगा कि सिर्फ लहर के भरोसे जीतने के बाद जनता के बीच छवि पार्टी के फायदेमंद होगी या नुकसानदायक। (संवाद)